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Unity news

April 4, 2024   

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Difference Between Desi Cow and Jersey Cow : कौन सी …


Animal care update : किसान और चरवाहे अपनी आय बढ़ाने के लिए कई प्रकार के दुधारू पशु पालते हैं। आजकल पशुपालन एक अच्छा व्यवसाय है। लेकिन गायों के बारे में सही जानकारी न होने के कारण कई बार देखा गया है कि चरवाहों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

 देशी गाय आमतौर पर स्थानीय नस्ल की होती है, जबकि जर्सी गाय एक विशेष नस्ल होती है जो उत्तर अमेरिका के जर्सी द्वीप से प्राप्त हुई है। दोनों में विभिन्न आयु, वजन, और दूध के उत्पादन की क्षमता में अंतर होता है। जर्सी गाय अक्सर अधिक दूध उत्पादित करती है और उसका दूध अधिक मात्रा में चरणों के अंदर उपयोग किया जाता है। देसी गाय के लम्बे सींग और बड़े कूबड़ होते है जबकि जर्सी गाय में ये सब नहीं होता है। देसी गायों का कद जर्सी गायों की अपेक्षा छोटा होता है। देसी गाय की तुलना में जर्सी गाय अधिक दूध देती है। देसी गायों को आमतौर पे बच्चा पैदा करने में 30-36 महीने लगते हैं जबकि जर्सी गायों को 18-24 माह ही लगते हैं।

      देशी गाय और जर्सी गाय  बीच के  फरक 

1: देशी गाय, जिसे भारतीय नस्लीय गाय भी कहा जाता है, भारतीय सबसे प्राचीन गाय नस्लों में से एक है। इन्हें भारत के विभिन्न क्षेत्रों में पाया जाता है। देशी गाय का विकास प्राकृतिक परिस्थितियों, पोषण, और क्षेत्रीय चर्चा के आधार पर होता है। ये गाय छोटे आकार और लंबे शिरों वाले होते हैं। उनकी शिंगें लंबी होती हैं और वे मोटे कुबड़े वाले होते हैं। देशी गाय का दूध साधारणत: 3 से 4 लीटर तक प्रतिदिन होता है। इन्हें आधुनिक नस्लों की तुलना में कम उत्पादक माना जाता है, लेकिन वे स्थानीय वातावरण में अधिक सक्रिय होती हैं और कम उपचार की आवश्यकता होती है।

2 : जर्सी गाय, उत्तर अमेरिका के जर्सी द्वीप से प्राप्त होने वाली एक विशेष नस्ल है। इनका वजन और आकार देशी गायों के मुकाबले थोड़ा अधिक होता है। जर्सी गाय की शिरा में थोड़ा संकुचित होता है और उनके शरीर का रंग गहरी भूरी या बैंगनी होता है। 

जर्सी गाय का दूध उत्तम गुणवत्ता का होता है और इनकी उत्पादनता भी अधिक होती है। आमतौर पर जर्सी गाय प्रति दिन 12 से 14 लीटर दूध देती है। इसके अलावा, इनका शरीर भी कम उपाय की आवश्यकता होती है और इनका विकास ठंडे तापमान के अनुसार होता है। जर्सी गाय का विकास ठंडे तापमान पर अधिक अवलंबित होता है।

थँक  यौ 


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Vaingangavarta19

April 3, 2024   

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आलेरे बावा जंगली हत्ती चामोर्शी तालुक्यातील विकासपल्लीत


आलेरे बावा जंगली हत्ती चामोर्शी तालुक्यातील विकासपल्लीत


 चार शेतकऱ्यांच्या मक्का पिकांचे केले नुकसान

चामोर्शी:-
 तालुक्यातील घोट वनपरीक्षेत्रा अतर्गत येत असलेल्या विकासपल्ली येथे दोन हत्ती आल्याची माहिती रात्रो 7:30 च्या दरम्यान उजेडात आली असून चामोर्शी तालुक्याच्या शेवटच्या टोक असेलल्या विकासपल्ली येथे आता हत्ती शिरल्याची माहिती असून दोन शेतकरी शेतीची राखण करीत असतांना हत्ती पासून जीव वाचविण्यासाठी झाडावर चढून जीव वाच्यविण्याच्या प्रयत्न केला.

याबाबत घोटच्या वनपरीक्षेत्र अधिकारी निलेश वाडीघरे यांना माहीती देण्यात आली असून हत्तीने विकासपल्ली गावालगत असलेल्या गौतम गौरचंद मंडल, गौरग सिदाम सरकार, निशिकांत दुर्गाचरण गाईन व नरेश नारायण मिस्त्री या चार शेतकऱ्यांचे मक्का पिकाचे मोठ्या प्रमाणात नुकसान केले आहे घटनेचे माहिती मिळताच घोट वन विभागाचे पथक रात्रो व आज सकाळी विकासपल्ली रवाना झाले आहे तसेच ड्रोन कॅमेऱ्याची मदत घेण्यात येणार असल्याची माहिती प्राप्त झाली आहे नागरिकांनी सावधगिरी बाळगावी असे आवाहन वनविभागाच्या वतीने करण्यात आले आहे.

हत्ती या परिसरात असल्याची माहिती मिळताच हुल्ला टिम सुद्धा या परिसरात दाखल झाली आहे.


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Unity news

April 2, 2024   

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Gardening tips : 'तलाव' मै ही नाही! आपके घर मै …


 

गार्डनिंग टिप्स: हॅलो दोस्तो घर मै कमल के पौधे को बेस्ट तरीके से लगाने के लिए, यह ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है कि आप उन्हें किसी भी समय नहीं लगा सकते। कमल के पौधे को सबसे अच्छे तरीके से लगाने का समय उनकी प्राकृतिक विकास अवस्था के अनुसार होता है। वे आमतौर पर गर्मी के महीनों में अधिक उगते हैं। उन्हें गर्मी के अंत में या गर्मियों की शुरुआत में लगाना अच्छा होता है। जब भूमि का तापमान 15-20 डिग्री सेल्सियस के बीच हो, तब आप कमल के पौधे को लगा सकते हैं। ध्यान दें कि बीज से पौधे तक का समय भी आधारभूत होता है। आपको बीज उपलब्ध होने के बाद और पौधे को लगाने के समय के बीच का सही संबंध बनाए रखना चाहिए।

एक कमाल का पौधा उगाने के लिए, सबसे पहले आपको एक अच्छे वातावरण के साथ अच्छी गुणवत्ता के बीज ढूंढने की आवश्यकता होगी। यह सुन्दर पौधा धूप और आच्छादित स्थान को पसंद करता है। इसके बाद, बीज को गर्म पानी में भिगोकर रात भर के लिए रखें। अगले दिन, उन्हें एक अच्छे खाद युक्त मिट्टी में बोना जाए, जिसमें खाद, मिट्टी, और रेत मिलाई गई हो। फिर ध्यान दें कि पौधा को नियमित रूप से पानी दिया जाए और उसे धूप और अच्छी हवा मिले। अन्य फलों की तरह, कमाल का पौधा भी धैर्य, संवेदनशीलता और संरक्षण की आवश्यकता होती है।

कमल का पौधा उगाने के लिए, निम्नलिखित चरणों का पालन करें:

1. बीज का चयन: पहले, एक अच्छे गुणवत्ता के कमल के बीज ढूंढें।

2. पोट में बोना: बीज को आपकी चयनित मिट्टी में बोने। मिट्टी में खाद मिलाना न भूलें।

3. पानी और धूप: पौधे को नियमित रूप से पानी दें, और उसे सूर्य की रोशनी मिलनी चाहिए।

4. देखभाल: पौधे की नियमित देखभाल करें, जैसे कि कीट प्रतिरोधक छिद्रों की जाँच और उन्हें हटाना।

5. फूलों की देखभाल: फूलों की देखभाल करें, जैसे कि पुष्पों को समय समय पर काटना और स्वच्छ रखना।

 

:कमल को घर में लगाने के लिए कुछ उचित जगहों की सूची: 

1. मिट्टी का पोट: कमल को बड़े मिट्टी के पोट में लगाना उचित होता है। ध्यान दें कि पोट में अच्छा ड्रेनेज होना चाहिए ताकि पानी नहीं जमा रहे।

2. गमला: छोटे कमल को गमले में लगाना भी उचित होता है, खासकर जब आपके पास कम जगह हो। ध्यान दें कि गमले में भी अच्छा ड्रेनेज होना चाहिए।

3. कमल के जलशाय में: कुछ लोग कमल को जलशाय में लगाते हैं। यह एक आकर्षक विकल्प हो सकता है, खासकर जब आपके पास छोटी जगह हो। इसके लिए विशेष तरह के जलशाय में पानी की स्तर को संभालना महत्वपूर्ण है।

 

याद रखें, पौधे की सही देखभाल और ध्यान से, आपके घर में एक सुंदर कमल का पौधा उगाना आसान हो सकता है।

Thank you.......

 


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Sanket dhoke

March 24, 2024   

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Agriculture News ; ३१ मार्चनंतरही कांदा निर्यातीवर बंदी कायम; दरात …


Agriculture News :- परदेशी व्यापार विभागाच्या महासंचालकांचे अतिरिक्त सचिव संतोष कुमार सारंगी यांनी यासंदर्भात आदेश जारी केले आहेत.

३१ मार्चनंतरही कांदा निर्यातीवर बंदी कायम; दरात घसरण सुरूच आहे


केंद्र सरकारच्या वाणिज्य मंत्रालयाने शुक्रवारी रात्री एक अधिसूचना जारी केली की, ३१ मार्च २०२४ नंतरही पुढील सूचना मिळेपर्यंत कांदा निर्यातबंदी लागू राहील. परदेशी व्यापार विभागाच्या महासंचालकांचे अतिरिक्त सचिव संतोष कुमार सारंगी यांनी यासंदर्भात आदेश जारी केले आहेत. कांदा निर्यात बंदीची अंतिम मुदत ३१ मार्च होती.

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या निर्णयामुळे कांदा उत्पादक शेतकरी संतप्त झाले आहेत, जे लोकसभेच्या निवडणुकीमुळे येत्या आठ दिवसांत निर्यातबंदी उठवण्याची वाट पाहत आहेत आणि त्यांच्या उन्हाळ कांद्याला बाजारात चांगला भाव मिळेल. कांद्याला किमान 300 रु. तर सरासरी दर 1200 रुपये आहे.

केंद्र सरकारने ७ डिसेंबर २०२३ रोजी कांद्याच्या निर्यातीवर बंदी घातली होती. कांद्याची आवक कमी होऊनही कांद्याच्या दरात घसरण सुरूच आहे. लाल व उन्हाळ कांद्याचा सरासरी भाव १४०० रुपये प्रतिक्विंटल आहे. परदेशात भारतीय कांद्याला मोठी मागणी; मात्र, निर्यातबंदीमुळे कांदा उत्पादकांना काही फायदा होताना दिसत नाही.

अधिक वाचा : Ajche Rashibhavish :- प्रकृतीची काळजी घ्यावी लागेल, कसा आहे आजचा दिवस..., काय सांगते तुमची राशीचक्र...

 

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Rameshmohurle

March 19, 2024   

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Tulsi Plant Tips : बार बार तुलसी का पौधा अगर …


 Tulsi Plant : भारतीय घरों में तुलसी का बहुत महत्व है. तुलसी को जितना धार्मिक महत्व है. उतनाही तुलसी में होने वाले गुणधर्म से सेहत को  अच्छा फायदा होता है. बहुत से घरों में तुलसी का पौदा और वृन्दावन दिखने को मिलता है. लेकिन बदलते ऋतु के अनुसार तुलसी के पौदे की विशेष देखभाल करनी होती है. फिलाल अभी गर्मी शुरू हो गई है. बढ़ते तापमान के कारन और किड लगने के कारण तुलसी सूख जाती है. इस मामलेमे लोग वो पौदा उखाड़ के नया दूसरा पौदा घर में लाते.

सूखे हुए तुलसी के पौदे को फिर से हरा भरा कारना है. तो मिट्ठी में नमक का इस्तेमाल करें. लेकिन नमक इस्तेमाल करने से सच में तुलसी का पौदा हरा भरा होता है क्या? तुलसी खिलनी चाहिए इसलिए मिट्ठी में नमक  किस प्रकार डालना चाहिए। नमक की वजह से गुण्ड्डी के पास कीड़े मकोड़े आते नहीं क्या? गर्मियों में तुलसी की देखभाल कैसे करें ? आइये देखते है. 

तुलसी के कुण्डी में नमक डालने से क्या होता है. 
नमक का इस्तेमाल सिर्फ भोजन का स्वाद बढ़ाना नहीं. तो पौदो के लिए भी इस्तेमाल कर साकते है. लेकिन तुलसी के कुण्डी में नमक का इस्तेमाल करने से क्या होता है. ऐसा विचार आपके भी मन में या होगा. वास्तव में नमक मेंसोडियम और अन्य पौस्टिक घटक मिट्ठी के लिए फायदेमंद होते है. 

इसके अतिरिक्त मिट्टी के पोषक तत्व को बढ़ाने का काम करते है.  इसलिए तुलसी की विकास बहुत अछेसे होता है.और कीड़े मकोड़े  से भी मुक्ति मिलती है. इसकी वजह से तुलसी कभी भी सूखती नहीं। रासायनिक कीटनाशकों इस्तेमाल लड़ने से अच्छा आप  नमक का इस्तेमाल कर सकते हैं.

तुलसी के पौधो में नमक डालने के लिए सबसे पहले एक बर्तन में एक लीटर पानी लीजिए और उसमे एक चमच नमक डालिए. इसके बाद चमच के मदत से उसको अच्छेसे मिला लीजिए। अब तैयार हो चूके पानी को स्प्रे बोतल में भरे. तैयार हो चूका स्प्रे तुलसी के पत्तो पर और मिट्टी में छिड़काव करें। इसके कारन पत्तो पर कीड़े बैठेंगे नहीं। और सबसे अच्छे रूप से तुलसी खिल जाएगी.

 


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Gadchiroli Varta News

March 13, 2024   

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अखंडित विद्यूत पूरवठ्याचा मागणीकरीता हजारो शेतकरी धडकले उपविभागीय कार्यालयावर


अखंडित विद्यूत पूरवठ्याचा मागणीकरीता हजारो शेतकरी धडकले उपविभागीय कार्यालयावर

कूरखेडा-

           कृषीपंप तसेच घरगूती विद्यूत वाहीणीवर मागील काही दिवसापासून सूरू करण्यात आलेले भारनियमनामूळे त्रस्त येथील हजारोचा संख्येत उपस्थीत शेतकर्यानी आज गांधी चौक ते उपविभागीय अधिकारी कार्यालय कूरखेडा येथे शाशन व विद्यूत कंपनी विरोधात गगणभेदी घोषणाबाजी करीत मोर्चा काढला व कार्यालयासमोरच ठिय्या आंदोलन सूरू केले.

           तालूक्यात वेगवेगळ्या ठिकाणी मनमानी पद्धतीने विद्यूत विभागाचा वतीने भारनियमन सूरू आहे घोषित भारनियमन कालावधी होऊनही अनेक ठिकाणी वारंवार होणार्या विद्यूत बिघाडामूळे सूद्धा विद्यूत पूरवठा बंद असतो त्यामूळे‌ विद्यूत कृषी पंप बंद पडत रब्बी धान हंगाम धोक्यात आला आहे त्यामूळे संतप्त शेतकर्यानी आज महाविकास आघाडीचे घटक पक्ष असलेल्या कांग्रेस व शिवसेना (उबाठा) कडून पूकारण्यात आलेल्या मोर्चा व ठिय्या आंदोलनात हजारोचा संख्येत सहभागी होत उपविभागीय कार्यालय समोर आयोजित ठिय्या आंदोलनात विज वितरण कंपनी व शाशनाचा विरोधात तिव्र शब्दात रोष प्रकट केला यावेळी मोर्चेकरूंचे निवेदन स्वीकारण्याकरीता आंदोलन स्थळी आलेले गडचिरोली येथील विद्यूत वितरण कंपनीचे कार्यकारी अभियंता मेश्राम याना रोषाचा सामना करावा लागला कूरखेडा येथील उपविभागीय विद्यूत अभियंता मिथून मूरकूटे व कढोली येथील शाखा अभियंता झोडापे यांच्या विरोधात तिव्र रोष होता मात्र ते आंदोलन स्थळी फिरकलेच नाही त्यामूळे अनूचीत प्रसंग टळला यावेळी पूर्ववत येथील विद्यूत पूरवठा अखंडित ठेवण्याचा मागणी करीता मोर्चेकरू अडून बसले होते व‌ विद्यूत विभाग व शाशनाविरोधात प्रचंड घोषणाबाजी करण्यात येत असल्याने पेच निर्माण झाला होता अखेर उपस्थीत कार्यकारी अभियंता यांचाशी भ्रमनध्वनीवर विधानसभेचे विरोधी पक्ष नेते विजय वडेट्टीवार यानी मोर्चेकरूंचा समक्षच संपर्क साधला व कार्यकारी अभियंता मेश्राम यानी तालूक्यात भारनियमन संध्याकाळी ६ ते सकाळी ६ या कालावधीत करण्यात येणार नाही तसेच दिवसाफक्त ४ तास कृषी पंपावर भारनियमन करण्यात येईल अशी लिखीत घोषणा केल्यावर शेतकर्यांचे समाधान होत आंदोलन मागे घेण्यात आले मोर्चाचे नेतृत्व विधान परिषद सदस्य आ.अभिजीत वंजारी कांग्रेस जिलाध्यक्ष महेन्द्र ब्राम्हणवाडे , शिवसेनाप्रमुख सुरेंद्र चंदेल, प्रदेश महासचिव डॉ नामदेव कीरसान माजी आमदार आनंदराव गेडाम, रामदास मसराम,माजी जि प उपाध्यक्ष मनोहर पोरेटी, वामनराव सावसागडे, नगराध्यक्ष अनीताताई बोरकर कांग्रेस तालुका अध्यक्ष जीवन पाटील नाट जिल्हा उपाध्यक्ष जयंत पाटिल हरडे शिवसेना उबाठा तालुका अध्यक्ष आशिष काळे माजी जि प सदस्य प्रभाकर तूलावी माजी प स सभापती गिरीधर तितराम महिला कांग्रेस ता अध्यक्ष आशाताई तूलावी कांग्रेस अनूसूचित जाति सेलचे जिल्हाध्यक्ष रजनीकांत मोटघरे माजी सभापती परसराम टिकले शेतकरी नेते शाम मस्के आदि हजर होते


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Saritagaode

March 13, 2024   

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Pik Karj yojana : 31 मार्चपूर्वी पीककर्ज भरा तरच व्याज …


खरिपासाठी घेतलेल्या पीक कर्जावरील व्याज परत पाहिजे असल्यास संबंधित शेतकऱ्याने 31 मार्चपूर्वी कर्ज भरणे आवश्यक आहे.कर्ज भरण्यासाठी आता केवळ 20 दिवसांचा कालावधी शिल्लक आहे.

त्यामुळे शेतकरी रकमेची जमवाजमत करण्यात व्यस्त असल्याचे दिसून येत आहे. यावर्षीपासून पहिल्यांदाच शेतकऱ्यांना व्याजासह कर्जाची पूर्ण रक्कम भरावी लागणार आहे. त्यानंतर व्याजाची रक्कम संबंधित शेतकऱ्याच्या खात्यात थेट जमा केली जाणार आहे. शेतीचा खर्च भागवण्यासाठी शेतकऱ्याला सावकाराच्या दारात उभे राहावे लागू नये, यासाठी पीककर्ज
योजना सुरू केली आहे.

 बँका शेतकऱ्यांना कर्ज देण्यास तयार होत नाहीत. ही बाब लक्षात घेऊन बँकांना पीककर्ज वाटपाचे उद्दिष्ट दिले जाते. याचा आढावा शासनामार्फत दर आठवड्याला घेतला जातो. मागील खरीप हंगामात बँकांनी 34 हजार 39 शेतकऱ्यांना 190 कोटी रुपयांचे पीककर्ज वितरित केले आहे.

 सदर पीककर्ज 31 मार्चपूर्वी भरले तरच
त्यावर बँकेने घेतलेले ६ टक्के व्याज परत केले जाणार आहे.
नियमित कर्जाची उचल करणारे अनेक शेतकरी आहेत. सदर शेतकरी कोणत्याही परिस्थितीत ३१ मार्चपूर्वी कर्ज भरतात. काही दिवसातच नवीन कर्ज बँका मंजूर करतात. त्यामुळे शेतकऱ्यांना पीककर्जाचे पैसे १० महिने बिनव्याजी वापरायला मिळतात.

शेतकऱ्यांमध्ये गोंधळ
 जिल्हा मध्यवर्ती सहकारी बँकेचे सर्वच शेतकरी यापूर्वी मुद्दलच भरत होते.आता मात्र व्याजसह रक्कम भरण्यास सांगीतले जात आहे. त्यामुळे शेतकरी संभ्रमात पडत आहेत.
आता त्यांना 6 टक्के व्याजदराने कर्ज भरावे लागणार आहे.

तेव्हाच मिळतो बिनव्याजी कर्ज
जवळपास जून महिन्यात पीककर्ज मंजूर केले जाते. हे कर्ज भरण्याची अंतिम मुदत 31 मार्च आहे. खरीप हंगामातील धान पीक डिसेंबर महिन्यात निघते. कडधान्याची पिकेही फेब्रुवारी महिन्यात निघतात. त्यामुळे मार्च महिन्यात शेतकऱ्यांकडे पैसा असतो. ही बाब लक्षात घेऊन पीककर्ज भरण्याचा शेवटचा दिनांक 31 मार्च ठरवण्यात आला आहे. त्यानंतर कर्ज भरल्यास व्याज माफीचा लाभ दिला जात नाही.

आधी व्याजासह कर्ज भरा त्यानंतर परत होणार व्याज
जिल्हा मध्यवर्ती सहकारी बँक यापूर्वी शेतकऱ्यांकडून कर्जाची केवळ मुद्दल घेत होती. व्याजाची रक्कम बँकेच्या खात्यात जमा होत होती. तर राष्ट्रीयकृत बँका शेतकऱ्याला व्याजासह रक्कम भरायला लावत होत्या. शासनाकडून बँकेला व्याजाची रक्कम मिळाल्यानंतर ती रक्कम संबंधित शेतकऱ्याच्या खात्यात जमा केली जात होती. आता मात्र शासन थेट संबंधित शेतकऱ्याच्या खात्यात डीबीटी अंतर्गत व्याजाची रक्कम जमा करणार आहे. त्यामुळे सर्वच बँका आता व्याजासह कर्जाची रक्कम वसूल करत आहेत.

Pik Karj yojana  : 31 मार्चपूर्वी पीककर्ज भरा तरच व्याज होईल माफ


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Vaingangavarta19

Feb. 28, 2024   

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उद्योगाकरिता शेतजमिनी देण्यास चामोर्शी तालुक्यातील शेतकऱ्यांचा नकार


उद्योगाकरिता शेतजमिनी देण्यास चामोर्शी तालुक्यातील शेतकऱ्यांचा नकार

शेतजमिनी मोजणी करण्यासाठी आलेल्या अधिकाऱ्यांना महिलांनी पाठवले वापस

गडचिरोली :  गडचिरोली जिल्ह्यातील चामोर्शी तालुक्यातील लोहखनिज उद्योगाकरिता कोनसरी लगतच्या गावखेड्यातील शेतजमिनी उद्योगाकरिता शासन हस्तगत करुन मोजणी करण्यासाठी आलेल्या अधिकाऱ्यांना महिलांनी रिकाम्या हाताने पाठवले आहे 
उद्योगांसाठी जमीन दिल्यावर आम्ही जायचे कुठे? जगायचे कसे? आमचा उदरनिर्वाह शेतीवरच अवलंबून आहे त्यामुळे भूसंपादनावरून शेतकऱ्यांमध्ये खदखद व्यक्त होत आहे  विकासाला आमचा विरोध नाही. लोह खनिजावर आधारित उद्योगांमुळे जिल्ह्याची ओळख बदलत आहे. परंतु यासाठी जर आमची सुपीक शेतजमीन सरकार घेणार असेल तर आम्ही कुठे जायचे,असा प्रश्न चामोर्शी तालुक्यातील शेतकऱ्यांनी उपस्थित केला आहे. या परिसरात उद्योगाकरिता’ प्रशासन मोठ्या प्रमाणात भूसंपादन करणार आहे. त्यामुळे शेतकऱ्यांमध्ये असंतोष निर्माण झाला आहे.
एकेकाळी दुर्गम आणि नक्षलग्रस्त अशी ओळख असलेल्या गडचिरोली जिल्ह्यात लोह खनिजांच्या साठ्यामुळे मोठमोठे उद्यागपती लाखो कोटी रुपयांची गुंतवणूक करण्यास उत्सुक आहेत. त्यामुळे जिल्ह्यात लोहखनिजावर आधारित उद्योग निर्मितीला वेग आला आहे. त्या पार्श्वभूमीवर चामोर्शी तालुक्यातील कोनसरीलगत महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडळाने तब्बल ९६३ हेक्टर जागेची मागणी केली आहे. यासाठी प्रशासनाने परिसरातील मुधोली (चक) २, जयरामपूर, पारडी (देव), सोमनपल्ली, कोनसरी, मुधोली (तुकुम) या ग्रामपंचायत हद्दीतील शेतकऱ्यांना भूसंपादनासाठी नोटीस पाठवली आहे. मात्र, शेजारी बारमाही वाहणाऱ्या वैनगंगा नदीमुळे सुपीक असलेली शेतजमीन देण्यास येथील शेतकरी तयार नाहीत. याविरोधात एकत्र येत या गावातील शेतकऱ्यांनी दोनवेळा मोठे आंदोलन केले होते.
गावात जमीन मोजणीसाठी आलेल्या महसुलच्या अधिकाऱ्यांना हाकलून लावले. प्रशासनाने कोणतीही पूर्वसूचना न देता थेट जमीन अधिग्रहण करण्यासाठी नोटीस पाठविल्याने शेतकऱ्यांनी आक्षेप नोंदवला आहे. जयरामपूर, मुधोली (चक) नं २ गावात तर जमिनीच्या संदर्भात कुणीही गावात येऊ नये असे फलक लावण्यात आले आहेत वर्षातून तीनदा उत्पन्न घेणारे सधन शेतकरी या भागात आहेत. त्यामुळे शेतजमिनी उद्योगासाठी दिल्यास आम्ही कुठे जायचे व जगायचं कसं असा प्रश्न ते उपस्थित करीत आहेत.

गडचिरोली जिल्ह्यात पहिल्यांदाच एवढ्या मोठ्या प्रमाणात शेती उद्योगासाठी अधिग्रहित करण्यात येत आहे त्यामुळे  परिसरातील शेतकऱ्यांशी संवाद साधला असता वेदराज पिंपळकर आणि सुनील गौरकार म्हणाले की, आमच्या दोन पिढ्या या शेतीवर मोठ्या झाल्या. मुलांचे शिक्षण, लग्न समारंभ ,घर सांभाळून पुन्हा शेतीकरिता मिळकत शिल्लक ठेवणे हे सगळे या शेतीच्या बळावर झाले. सिंचनाच्या सोयीमुळे येथील शेतजमीन सुपीक आहे. त्यामुळे आम्ही शेतीतून १० ते १५ लाख रुपयांचे उत्पन्न काढत असतो कंम्पणीला जमिनी दिल्या तर नाममात्र वेतनावर काम करीत राहावे लागते

सूरजागड टेकडीवर उत्खनन करणाऱ्या लॉयडस मेटल्स कंपनीचा कारखाना कोनसरी येथे उभा उभारण्यात येत आहे. पहिल्या टप्प्याचे कामही पूर्ण झाले आहे. सोबतच जिंदाल, मित्तल, सूरजागड इस्पात सारख्या कंपन्यांनी १ लाख कोटीहून अधिक गुंतवणुकीची घोषणा केली आहे. पण यासाठी जमीन कुठून आणणार हा प्रश्न उपस्थित झाला आहे. जिल्ह्यात ७५ टक्के जंगल आहे. खासगी भूसंपादनाबाबत शेतकऱ्यांमध्ये रोष आहे. एवढेच गरजेचे असेल तर शासनाने कायद्यात बदल करून वनजमिन उद्योगांसाठी द्यावी असेही त्यांचे म्हणणे आहे. त्यामुळे भविष्यात प्रशासन विरुद्ध शेतकरी असा संघर्ष अधिक तीव्र होण्याची चिन्हे दिसत आहेत.


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Nikhil Alam

Feb. 24, 2024   

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PM kisan Yojana : 28 फरवरी से पहिले जरूर निपटा …


PM Kisan Yojana 16th installment सरकार इस महीने 28 फरवरी को पी एम किसान योजना की 16वी कीस्त जारी करेगी l सरकार किसानो के अकाउंट में 2000 रुपये की राशि डालेगी l हालकी इस योजना की राशी काही किसानो के अकाउंट में नही आएगीl अगर आप भी इस योजना का लाभ उठाना चाहते है तो आपको जल्द से जल्द यह काम पुरा करना होगाl

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली_ सरकार देश के सभी वर्ग के लिए कही तरह की स्कीम चला रही है l ऐसे मे सरकारने किसानो को आर्थिक सहायता देने के लिए पीएम किसान सन्मान निधी योजना (PM Kisan Samman Nidhi Yojana)  शुरू की हैl इसमे किसानो को सालाना 6,000 रुपये राशी किस्तो के तोर पर दी जाती हैl

हर किस्त मे किसानो के अकाउंट में2,000 रुपये की राशी आती है l पीएम किसान योजना (PM kisan Yojana) का लाभ पाने के लिए किसानो को कही जाने की जरूरत नही है l सरकार डीबीटी माध्यम से किसानो के जारी करती है l

सरकारने नवंबर मे 15 वी किस्त जारी कि थी l अब सरकार 28 फरवरी 2024 को देशभर के सभी किसानो को 16 वी किस्त का तोफा देंगेl इसका मतलब है कि इस दिन किसानो के अकाउंट में पीएम किसन योजना के तर 2,000 रुपये की राशि आयेगीl हलांकी, ही योजना का लाभ काही किसानो को नही मिलेगाl 

अगर आप भी इस योजना का लाभ पाना चाहते है तो आपको जल्द से जल्द ई - केवायसी(e- KYC) और जमीन का सत्यापन करवा लेना चाहिये l सरकारने ई - केवायसी को अनिवार्य कर दिया हैl जीन किसानो ने ई - केवाईशी नही करवाया है उन्हे इस योजना के लाभ से वंचित रहना होगाl

कैसे करे ई - केवायसी

*.  आप पी एम किसान पोर्टल पर जाये l

*. अब ई - केवायसी के ऑप्शन को सिलेक्ट करेl

*. इसके बाद अपना मोबाइल नंबर दर्ज करे l

*. आब फोन मे आये ओटीपी को भरे और इस तरह ई - केवायसी हो जायेगाl

आप पीएम किसान ऐप (PM Kisan App) को इन्स्टॉल करे और लाग - इन करेl इसके बाद फेस ऑथेंटीकेशन (Face Authentication) के जरीये ई - केवायसी करेl

अगर आप ऑनलाइन ई - केवायसी नही कर सकते है तो आप अपने घर के नजदीक किसान CSC (Common service centre) पर जाकर बायोमेट्रिक ऑथेंटीकेशन के जरी ई -  केवायसी कर सकते हैl

आप ई - केवायसीकी तरह जमीन सत्यापन भी कर सकते हैl इसके लिये आपको मोबाईल ॲप पोर्टल पर जमीन से रिलेटिव्ह डॉक्युमेंट को अपलोड करना होगा l 


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Vande Mataram Express

Feb. 24, 2024   

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PM Kisan Yojana : अब किसानो के खाते में आएंगे …


किसानों को मिलेगा अब नमो योजने का दूसरा और तीसरा हफ्ता 
इसमें कोनसे किसान योग्य है इस से सम्बन्धित जो राज्य सरकार के माध्यम से सरकार का फैसला हो चुका है. इस सरकार निर्णय में जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदान की गई है.

नमो शेतकरी महा सम्माननिधि योजना के अंतर्गत तीसरा हप्ता लाभर्थियोंके खाते में जमा करने के लिए 2 करोड़ रुपये इतना निधि राज्य सरकार के माध्यम से एक फिर से मंजूर किया गया है.साल 2023-2024 के भाषण में पंतप्रधान किसान सम्माननिधि योजना में राज्य सरकार के  अनुदान में जोर देने वाली नमो शेतकरी महासंबंधी योजना (Namo Shetkari Mahasanchal Yojana) की घोषणा की गई.

केंद्र सरकार के प्रधानमत्री किसान सम्माननिधि योजना (Pradhan Mantri Kisan Sammannidhi Yojana) के अंतर्गत दिए जाने वाले प्रति किसान प्रति वर्ष 6,000 हजार रुपये अनुदान में राज्य सरकार की और 6,000 हजार रुपये निधि में जोर देनेवाली नमो शेतकरी महासंबंधी योजना (Namo Shetkari Mahasanchal Yojana) शुरू की गई और योजना मान्यता भी प्राप्त कर चुकी है.

दूसरे हप्ते के लिए भी ये निधि एप्रिल से जुलाई इस कालावधि में आनेवाले पाहिले हप्ते जुलाई इस कालावधि के लिए था दूसरा हप्ता अगस्त से नवंबर इस कालावधि में था.दिसम्बर से मार्च इस कालावधि के लिए अब आने वाली 28 फरवरी 2024 को नमो शेतकरी महासंबंधी योजना के दो हप्ते यानि की ४ हजार रुपये और PM (Kisan Sammannidhi Yojana) के 2 हजार रुपये इस तरीके से योग्य किसानों के खाते पर नमो शेतकरी महासंबंधी और पीएम किसान सम्माननिधि योजना इस दोनों के मिलकर 6,000 रुपये योग्य किसानों के खाते में वितरित किया जाएगा.

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Vaingangavarta19

Feb. 13, 2024   

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घराला लागली आग , क्षणार्धात पाच लाखांचे साहित्य स्वाहा


घराला लागली आग , क्षणार्धात पाच लाखांचे साहित्य स्वाहा

 


सिरोंचा :-
 तालुक्यातील नरसिंहापल्ली येथील एका घराला मध्यरात्री आग लागून पाच लाखांचे साहित्य जळून खाक झल्याची घटना दहा फेब्रुवारी ला घडली
रविंद्र शंकर चेनूरी असे आग लागून घर व साहित्य जळालेल्या इसमाचे नाव असून घटनेच्या दिवशी संपुर्ण कुटुंब गाढ झोपेत होते तेव्हा अचानक घराला आग लागली. झोपडीच्या घराला आगीने काही क्षणातच कवेत घेतले. यात घरातील 30 क्विंटल कापूस व जीवनाउपयोगी साहित्य जळून खाक झाले
 घराला आग लागल्याचे लक्षात येताच संपुर्ण कुटुंब घराबाहेर पडले म्हणून सुदैवाने कुटुंब थोडक्यात बचावले
 .रवींद्र शंकर चेनुरी रा. नसिंहापल्ली हे झोपडीवजा घरात वास्तव्यास रहात होते. 10 फेब्रुवारी रोजी चेत्रुरी कुटूंब नित्याप्रमाणे जेवण करून झोपी गेले. मध्यरात्री अचानक घरातून आगीचे लोळ बाहेर पडण्यास सुरुवात झाली. पाहता पाहता संपूर्ण घरात आग पसरली. यात शेतातील पिकवलेला तीस क्विंटल कापूस साठा करून ठेवला होता तो 30 क्विंटल कापूस आगीच्या भक्ष्यस्थानी सापडून खाक झाला. संसारोपयोगी साहित्यासह संपूर्ण घराची आगीत राखरांगोळी झाली. यात अडीच लाखांचा कापूस व इतर साहित्य, असे पाच लाखांचे नुकसान झाल्याचा दावा रवींद्र चेनुरी यांनी केला आहे. दरम्यान, आग नेमकी कशामुळे लागली, याचे नेमके कारण समोर आलेले नाही. आर्थिक नुकसान भरपाई द्यावी, अशी मागणी होत आहे.

वर्षभर केलेली मेहनत क्षणात गेली वाया

दरम्यान, चेनुरी यांना दोन एकर शेती आहे. दुसऱ्याची तीन एकर शेती त्यांनी कसायला घेतली होती. पाच एकर शेतीत मोठ्या कष्टाने त्यांनी कापूस पिकवला होता. कापसाचे दर सध्या गडगडले असल्याने दर वाढेल या आशेने त्यांनी त्यांनी कापूस विकला नव्हता. मात्र, आगीने घात केला व वर्षभर केलेली मेहनत क्षणात वाया गेली.


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Bahujnancha Buland Aawaj

Feb. 10, 2024   

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शासनाच्या उदाशीन धोरणा विरोधात शेतकऱ्यांनो रस्त्यावरची लढाई लढायला शिका रमेश …


देशातील आणि राज्यातील सरकार शेतकऱ्यांकरिता राबविल्या जाणाऱ्या योजना शेतकऱ्यांच्या काहीच फायद्याची नसून शेतकऱ्यांची नुसती दिशाभूल करणारी असून,अशाने शेतकरी देशोधडीला गेल्याशिवाय राहणार नाही,म्हणून अशा फसव्या सरकार पासून वेळेस सावधान होणे गरजेचे आहे.

हे सरकार शेतकऱ्यांना निस्तानाबुत करण्याचे धोरण अवलंबिले असून.सरकार शेतकऱ्यांची फसवणूक करीत आहे आणि आपल्या मागण्या मान्य करून घ्यायच्या असतील तर आता सरकारविरोधात रस्त्यावर उतरून लढाई लढल्याशिवाय दुसरा कोणताच मार्ग उरलेला नाही.त्यामुळे अशा फसव्या सरकारला जाब विचारण्यासाठी शेतकऱ्यांनी रस्त्यावरची लढाई लढणे गरजेचे आहे असे आवाहन रमेश चौखुंडे यांनी केलेले आहे.

कृषी पंप धारक शेतकऱ्यांना भारनियमन लागू करून शेतकऱ्यांच्या जिवावर उठण्याचा प्रकार आहे.भारनियमनामुळे भात पिकाचे उत्पन्न अर्ध्यावर आले जेव्हा शेतात भरपूर पाण्याची गरज होती तेव्हा ८ तास वीज मिळत होती,जसे भात पिकाची कापणी सुरू झाली आणि त्यानंतर १२ तास वेळ सुरू झाली.१२ तास विज म्हणून शेतकऱ्यांनी पुन्हा पिकाची लागवड सुरू झाली आणि शेतात पिक बहरत असताना किंवा शेतीला भरपूर पाण्याची गरज असताना परत ८ तासांवर वीज आली म्हणजे हे सरकार शेतकरी विरोधी आहे असं समजायला काहीच हरकत नाही.

 कोणसरी परिसरात जयरामपूर,मुधोली,सोमनपल्ली,गणपुर,विठ्ठलपूर भागातील अतिसुपीक जमिनीवर एमआयडीसी (MIDC) स्थापन करून शेतकऱ्यांच्या सुपीक जमिनी कारखानदार यांच्या हवाली करण्याचा प्रयत्न सुरू आहे.सुपीक जमिनीवर उत्पन्न घेणारा शेतकरी मेला तरी चालेल परंतु कारखानदार जगला पाहिजे,अशी विचारसरणी सरकारची आहे तर अशा सरकारला शेतकरी विरोधी सरकार म्हणायचं नाही तर काय म्हणायचं.

एमआयडीसी निर्माण करून जमिनी कारखानदाराच्या घशात गेली तर सर्वप्रथम शेतकरी नावाची जात शिल्लक राहणार नाही म्हणून शेतकरी जिवंत ठेवायचं असेल तर वेळेत सावधान होऊन रस्त्यावरची लढाई लढणे गरजेचे आहे.

 

आणखी वाचा : जीव गेला तरी जमीन देणार नाही 

 

शेतकऱ्यांना माझी नम्रपणे एकच विनंती आहे सर्व शेतकरी बंधू एकत्र या संघर्ष करा आणि आपली रास्त मागणी पदरात पाडून घ्या. अन्यथा देशातील व राज्यातील सरकार धनदांड्ग्याचे,भांडवलदारांचे सरकार आहे.शेतकऱ्यांना कधी गिळंकृत करेल याचा अंदाज नाही कठोर परिश्रमाशिवाय कोणतेही गोष्ट शक्य होणार नाही असं बाबासाहेबांची शिकवण आहे त्यांचे आचरण करा आणि अशा लबाड लांडग्यांपासून सावध राहा.


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Bahujnancha Buland Aawaj

Feb. 8, 2024   

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शासन आपल्या दारी,हा नारा देत शासनाने उभारले कृषी पंप धारकांवर …


शासन आपल्या दारी,हा नारा देत शासनाने उभारले कृषी पंप धारकांवर कुऱ्हाड, १२ तासांची वीज आता ८ तासांवर

शासन आपल्या दारी हा नारा देत महाराष्ट्र शासनाने कितीही पोकळ वलग्ना करीत असेल तरी पण हे सरकार शेतकऱ्यांना निस्तनाबुत करून सोडणारे आहे,हे आजच्या भारनियमना वरून दिसून येत आहे.

चंद्रपूर आणि गडचिरोली जिल्ह्यातील बोटावर मापन्या एवढ्या भागात भारनियमन सुरू करून.शासनाने कृषीपंप धारक शेतकऱ्यांवर अन्याय केलेला आहे. हे सरकार शेतकऱ्यांविरोधी आहे,हे यावरून स्पष्ट होताना दिसतो आहे.

 शेतकरी आपल्या कुटुंबाच्या उदारनिर्वाह करण्यासाठी काहीही रोजगार नसल्यामुळे नाईलाजाने शेतीचा व्यवसाय करतो आहे परंतु महाराष्ट्रातील सरकार जाणून-बुजून शेतकऱ्यांना नाहक त्रास देण सुरू केलेलं आहे.

भारनियमन सुरू असल्यामुळे शेतकऱ्यांच्या धान पिकाला फटका बसून उत्पन्नात घट झाली आणि सरकारने भारनियमन लादून शेतकऱ्यांवर अन्याय केलेला आहे.

कित्येकदा निवेदन देण्यात आले कित्येक ठिकाणी कृषीपंप धारक आपल्या हक्काच्या मागणीसाठी रस्त्यावर उतरून आंदोलन देखील करण्यात आले होते.

शेतकऱ्यांच्या धान पीक शेतात डोलत होता तेव्हा आठ तास विज मिळत होती त्यामुळे धान पीक नष्ट झाले. जशी धान पिकाची सीजन संपली तेव्हा शासनाने बारा तास वीज सुरू केली आणि पुन्हा पेरणी करून शेतात पिक भरत असताना बारा तासांवरून परत आठ तास वीज देऊन शासनाने कृषी पंप शेतकऱ्यांच्या तोंडाला पाने पुसली,हे यावरून सिद्ध होत आहे.

 

आणखी वाचा : ऊर्जामंत्री देवेंद्र फडणविसांच्या अलगर्जी पणामुळे कृषिपंप धारक शेतकऱ्यांवर ओढावला संकट

 

कृषी पंप शेतकऱ्यांनवर भारनियमन लादून हे सरकार शेतकऱ्यांना निस्तनाबूत करण्याचा षडयंत्र करीत नाही ना ? अशी भावना शेतकरी करताना दिसून येतोय आणि हे जर असंच राहत असेल तर येणाऱ्या निवडणुकीत सरकारचा खरा चेहरा शेतकरी बदलवून टाकल्याशिवाय राहणार नाही,हे तितकेच खरं आहे. हे सरकार शेतकरी विरोधी सरकार असल्यामुळे, अशा सरकारला मुळासकट उपडून फेकल्याशिवाय दुसरा कोणताच पर्याय शेतकऱ्यांसमोर उरणार नाही.


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Pankaj patil

Feb. 3, 2024   

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मोगऱ्याचे रोप सुगंधीत फुलांनी बहरेल, लहानशा रोपलही येतील बहरून फुले.


घरामेते लोकाना विविध प्रकारची रोपं लवायला आवदतात. थोक फुलां मध्ये मोग्ऱ्याचं रोप अनेकजं लवं पसंतदतत्। पन्ढऱ्याशुभ्र दिसनाऱ्या मोगऱ्याच्या फुलांचा सुगंध मनाला शांति देतो। घरत किनवा अंगनात मोगऱ्याचं रोप लावल्यास घरभर याचा सुगंध दरवळतो। त्यामुळे घरबाहेर कुंडित किण्वा जामिनित मोगऱ्याचे रोपटे लावले जाते हैं।

मोगऱ्याचे रोपटे लवल्यानंतर याची विशेष काळजी घ्यावी लागत. जर योग्य काळजी नहीं घाटल्यास रोपला फुलं येनं कमी होतं। रोपओवर अगादी 3-4 मोजकिच फुलं दिसु लागत आपल्या घरातलन मोगऱ्याचं रोप फुलांनी बहरून जावं अ वत संट एसेल तर, 4 गोष्टी फॉलो करा। या टिप्समुले मोगऱ्याचे रोपटे फुलानी बहरेल शिवाय घरभर सुगंध दारवळेल 

मोगऱ्याचे रोपटे तेव्हाच बहरेल, जेव्हा रोपटेला उत्तम प्रकारे सूर्यप्रकाश मिळेल. तथ्य 1- तासांच्या सूर्यप्रकाशात मोगऱ्याचे रोपे2 उत्तमारित्या फुलेल। पन जस्त वेळ सूर्यप्रकाशत तेवु नाका। यामुळे रोपटे सार्वभौम जेल.

प्लास्टिकच्या कुंडित लावू नाका मोगरा

आजकाल बरेच जन मतिच्या कुंडी सोडून प्लास्टिकच्या कुंडीत रोपटे लावतात. जे रोपोट्यांसथी नहीं. यामुळे रोपते बुरा हो सकता है. मोग्याचे रोपटे लावताना प्लास्टिक नसून, माटीच्या कुंडित लावा। प्लास्टिकच्या कुंडीत मोगऱ्याचे रोपटे लवल्याने मुळे खराब होतात. रोपटे हळूहळू कोर्डे हउ लागत. इससे पहले कि आप सिमेंटच्या कुंडित रोपटे लावावे का उपयोग कर सकें.

मोगरा असो किनवा इतर झाड, प्रत्येक रोपोट्याच्या वाधिस ख़तम गेरेचं आहे. महिन्यातून एकदा मातीत शेखत मिसला. यामुळे रोपोट्याची वाढ भारभर होइल. शिवाय रोतत्याला सुरलिंग पांढरेशुभ्र फुले येतिल.कपड्यानवर्चे दाग काधायचा घ्या सोपा फॉर्म्युला, 1 चमचमा सनितायझरची जादू-न घासता कपडे चकाचक

माटी कॉर्डि होउ देउ नाका

मोगऱ्याच्या रोप्त्याची मुख्य वाढ सूर्यप्रकाशात होते हैं। पन सूर्यप्रकाशमुळे कुंडितली मति कॉर्डी हाउ लागत। यामुळे पानं पिवळी तरताच, शिवाय रोपत्याला फुलंही येत नहीं। त्यामुळे रोपोट्याला नियमित पानी देनं गरेचं आहे.


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Bahujnancha Buland Aawaj

Jan. 31, 2024   

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विहीर अनुदान चार लाख रुपये,प्रत्येक शेतकऱ्याने लाभ घ्यावा


महाराष्ट्र सरकारने सिंचनाची सोय व्हावी म्हणून मागेल त्याला विहीर या धर्तीवर योजना राबविणे सुरू केलेले आहे.तरी राज्यातील प्रत्येक शेतकऱ्यांनी या योजनेचा लाभ घ्यावा, अशी कळकळीची विनंती रमेश चौखुंडे यांनी केलेली आहे.

मागेल त्याला शेततळा याच धरतीवर महाराष्ट्र सरकारने शेतकऱ्यांसाठी चार लाख रुपये अनुदानावर विहीर योजना सुरू केलेली आहे.आणि ह्या योजनेचा महाराष्ट्रातील तमाम शेतकऱ्यांनी लाभ घ्यायला पाहिजे,कारण शेती आणि पाणी हा एक सामायिक कार्यक्रम असल्यामुळे.शेतकऱ्यांनी आपाआपल्या शेतामध्ये विहिरीचे खोदकाम करून आपाआपली शेती अधिक बळकट करावी,हीच अपेक्षा.

प्रत्येक ग्रामपंचायतीकडून किमान 15 लाभार्थी निवडणे,असे महाराष्ट्र सरकारने जाहीर केलेले आहे.तरी पण या योजनेचा लाभ घेण्यासाठी एका ग्रामपंचायतीकडून 15 पेक्षा जास्त लाभार्थ्यांना या योजनेचा लाभ घेता येतो,तरी तमाम महाराष्ट्रातील शेतकऱ्यांनी या योजनेचा लाभ घ्यावा, अशी कळकळीची विनंती रमेश चौखुंडे यांनी शेतकऱ्यांना केलेली आहे.

या योजनेचा लाभ ग्रामपंचायत सचिवाकडे किंवा आपल्या स्वतःच्या शेतामधून ऑनलाइन पद्धतीने करू शकता आणि याचा लाभ तीन टप्प्यांमध्ये मिळवता येते तरी शेतकरी बांधवांनी जास्तीत जास्त पद्धतीने याचा लाभ घेऊ शकतो.

 

 

  •  या योजनेचा लाभ खालील प्रमाणे मिळतो

 १) पहिला अनुदान विहीर खोदकामापूर्वी 

 २) दुसरा अनुदान विहीर खोदकाम 30 ते 60 टक्के झालेले असताना .

 ३)  तिसरा अनुदान खोदाई पूर्ण झाल्यावर पूर्ण अनुदान दिले जाईल.

ज्या शेतकऱ्यांना स्वतःच्या शेतामध्ये ऑनलाईन करता येत नसेल तर ग्रामपंचायती सचीवाकडे आपल्या नावाची नोंदणी करता येऊ शकते.फक्त शेतकरी बांधवांना एवढीच विनंती करू इच्छितो की,विहीर खोदकामाचा आदेश येईपर्यंत विहिरीचे खोदकाम करूनये.अन्यथा विहिरीचे अनुदान ना मंजूर होऊ शकते,याची काळजी शेतकरी बांधवांनी घ्यावी.

प्रत्येक ग्रामपंचायतमधील रोजगार सेवक यांच्याकडे सविस्तर माहिती उपलब्ध आहे त्यांच्याशी संपर्क साधावा.

 

  • विहीर खोदकामाला लागणारे कागदपत्र 

शेतकऱ्यांचा सातबारा,नमुना आठ अ व जॉब कार्ड इत्यादी कागदपत्रे घेऊन अपलोड करू शकता किंवा ग्रामपंचायतकडे स्वतः जाऊन जमा करू शकता.

 

आणखी वाचा : भूसंपादनामूळे कोनसरी परिसरातील शेतकरी उद्वस्थ होणार

 

ज्या जागेवर विहिरीचे बांधकाम करायचे आहे त्या जागेची पाहणी लघु पाटबंधारे शाखा अभियंता कडून किंवा उपअभियंताकडून सर्वप्रथम जागेची तपासणी केल्या जाईल आणि त्यानंतर विहीर अनुदानाला स्वरूप प्राप्त होईल.तरी शेतकरी बांधवांनी कसल्याही प्रकारची शंका कुशंका उपस्थित न करता सदर योजनेचा लाभ घ्यावा,अशी विनंती राज्यातील तमाम शेतकऱ्यांना करण्यात येत आहे.


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Vaingangavarta19

Jan. 31, 2024   

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कोरंबी ग्रामस्थांनी वृक्ष दिंडी काढून वृक्षारोपण कामाचे केले उद्घाटन


कोरंबी ग्रामस्थांनी वृक्ष दिंडी काढून वृक्षारोपण कामाचे केले उद्घाटन


                         

नागभीड --:
सामूहिक वन हक्क प्राप्त ग्रामसभा  कोरंबी ता. नागभीड च्या वतीने सामूहिक वनहक्क क्षेत्रात वृक्षारोपण कामाचा शुभारंभ तसेच सामूहिक वन हक्क व्यवस्थापन समितीचे कार्यालयाचे उद्घाटन दिनांक २९जानेवारी २०२४ रोजी दिलीप गोडे आणि डॉ  किशोर मोघेयांचे हस्ते समन्न झाला आहे.
वनहक्क कायदा 2006 अंतर्गत समूहिक वनहक्क प्राप्त ग्रामसभांना 30 नोव्हेंबर 2021 च्या शासन निर्णय नुसार रोजगार हमी योजनेची अंमलबजावणी यंत्रणा म्हणून मान्यता मिळाली आहे. सदर शासन निर्णयान्वये ग्रामसभा कोरंबी ला वनहक्का क्षेत्रात वृक्षारोपण  कामासाठी रु. ४६७८३४८रुपयांची निधीस तहसीलदार मनोहर चव्हाण यांनी प्रशासकीय मान्यता नुकतीच दिली आहे. या वृक्षारोपण कामाला सुरुवात करण्याचे हेतूने वृक्षारोपण शुभारंभ कार्यकामाचे आयोजन समूहिक वनहक्क समिती कोरंबी च्या वतीने करण्यात आले होते. यावेळी हनुमान मंदिर पासून एक पालखी तयार करून वृक्ष दिंडी,लेझीम,भजन व बँड पथकासह पाहुण्यांचे भव्य स्वागत करण्यात आले.  तसेच  पुष्पगुश्चाने दिलीपजी गोडे, कार्यकारी संचालक विदर्भ निसर्ग संरक्षण संस्था नागपूर , डॉ किशोरजी मोघे ,संस्थापक ग्रामीण समस्या मुक्ती ट्रस्ट यवतमाळ, गुणवंत वैद्य, रुपचंदजी दखने कुरखेडा यांचा सत्कार करण्यात आला.  या कार्यक्रमाला प्रमुख अतिथी केशव जांभुळे , अध्यक्ष सामुहिक वन हक्क व्यवस्थापन समिती कोरंबी, डॅनिअल देशमुख, मुख्याध्यापक जिल्हा परिषद शाळा कोरंबी,यशवंत मेश्राम, सरपंच मांगरूड,  रिवॉर्ड्स संस्थेचे समन्वयक भोजराज नवघडे, कैलास नन्नावरे, , ग्रुप ऑफ ग्रामसभा नागभीड चे सचिव मनोहर मगरे, कोरंबी ग्रामसभेचे सल्लागार केशव खंडाते, प्रफुल मसराम,यांची प्रमुख उपस्थिती होती.
यावेळी विदर्भ निसर्ग संरक्षण संस्था नागपूर चे कार्यकारी संचालक दिलीप गोडे आणि  किशोरजी मोघे ,संस्थापक ग्रामीण समस्या मुक्ती ट्रस्ट यवतमाळ यांच्या हस्ते वृक्ष रोपण व कार्यालयाचे उद्घाटन करून सुभारंभ करण्यात  आले. प्रमुख ग्रामस्थांना   प्रमुख अतिथीची समयोचित मार्गदर्शन करण्यात आले. कार्यक्रमाचे स्वागत गीत जिहा परिषद शाळा कोरंबी यांनी सादर केले,  संचालन शंकर नन्नावरे यांनी केले तर आभार प्रदर्शन डॅनिअल देशमुख यांनी केले. कार्यक्रमाचे यशस्वीतेसाठी समूहिक वनहक्क समितीचे सर्व पदाधिकारी, महिला प्रतिनिधींनी तसेच सर्व कोरंबी वासियानी अथक परिश्रम घेतले.