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अवैध उर्वरक, कीटनाशक और ब्रॉंडेड शासकीय बोरियॉ जब्‍त


दो मंजिला भवन में चल रहें गोरखधंधे पर कृषि विभाग ने की कार्रवाई

फर्म संचालक व सहयोगी सहित 2 कंपनियों के खिलाफ प्रतिवेदन प्रस्‍तुत

बालाघाट :-

जिले के वारासिवनी में कृषि विभाग ने कटंगी रोड़ के काशल घराना उत्कर्ष सिटी परिसर स्थित गोदाम में नकली खाद, बीज और कीटनाशकों का ज़खीरा पकड़ा है। यहां अवैध उर्वरक, कीटनाशक और ब्रांडेड बीज कंपनियों की प्रिंटेड बोरियाँ और सिलाई मशीन जब्त की गई है। इस मामलें में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्रीमती प्रतिभा टेम्भरे ने बताया कि एग्रीजोन के संचालक श्री अजय कटरे और पौरुष भगत द्वारा गोदाम में प्रिंटेड शासकीय बोरी और अन्य बोरियों में सुपर फॉस्फेट को डाय अमोनियम बनाकर भेजने का काम करते हुए पकड़ा गया है। गोदाम से सिलाई मशीन के साथ ही प्रिंटेड बोरियाँ भी पायी गई। गोदाम से प्राप्त सामग्री के बिल वाउचर भी संचालक के पास नहीं पाए गए। पायी गई सामग्री भी बिना लॉट नम्बर की थी। साथ ही गोदाम के ऊपरी तल के कमरों में अवैध पैकिंग व वैधता अवधि समाप्त हुए कीटनाशकों के ड्रम पाये गए। गोदाम में रखी ब्रांडेड कंपनियों की प्रिंटेड बोरियों को वाहन क्रमांक जीसी-04-एमटी-1186 में भरकर अन्यत्र परिवहन कर छुपाने की कोशिश की जा रही थीं। इसके बाद तत्काल पुलिस को सूचना देकर आगे की जांच की गई। जांच के बाद कई तरह की अनियमितताएं सामने आयी है। कृषि विभाग द्वारा पुरी कार्यवाही का प्रतिवेदन कलेक्‍टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा और पुलिस थाना वारासिवनी में प्रस्‍तुत किया गया।

अवैध उर्वरक, रासायनिक व जैविक कीटनाशक किया जब्‍

कृषि उपसंचालक श्री राजेश कुमार खोबरागढ़े ने बताया कि कृषि और पुलिस विभाग द्वारा की गई इस कार्रवाई में चित्तौड़गढ़ राजस्थान की जुबिलेंट एग्री एंड कंज्यूमर प्रा.लि. का सुपर अल्ट्रागोल्ड की 50 कि.ग्रा. के भर्ती में 1200 बोरियों में 600 क्विंटल उर्वरक बरामद की गई। वहीं छत्तीसगढ़ राजनांदगांव की कंपनी कविता बॉयो फर्टिलाइजर की आनंद छाप सुपर पावडर की 50 किग्रा की भर्ती में 300 बोरियों में कुल मात्रा 150 क्विंटल, अहमदाबाद की सूजल जीपी. एग्रो लाईफ की 50 किग्रा.भर्ती में 93 बोरियों कुल मात्रा 46.50 क्विटल उर्वरक जब्‍त किया गया। इसके अलावा गुजरात राजकोट की जीपी एग्रो लाइफ कंपनी के हैक्जाकोनाजोन के 20 बाक्‍स, थायनेट 10-जी के 80 ड्रम, छत्‍तीसगढ़ दुर्ग की कंपनी फार्मर बायोग्राफ साइंस के 42 बॉक्‍स तथा गुजरात की कंपनी जीपी एग्रो लाइफ के काग्रोमेन फंजीसाइड के 06 बॉक्‍स भी बरामद हुये। वहीं जैविक कीटनाशकों में जीएस ग्राफ साइंस कुमारखेड़ा की कंपनी के सर्वशक्ति जाइम की 200 बाल्‍टी, पारस विटा गोल्‍ड आर्गेनिक मैन्‍यूर की 50 बाल्टियॉ, रूट पावर की 28 बाल्टियॉ, फ्युरेन 3-जी कार्बोफ्युरान के 35 बैग तथा अन्‍य कीटनाशकों में केनान सल्‍फर, जेल्‍शन, आतंक बुस्‍टर, थार-30, क्‍योटेक सूपर, एसपी क्‍लोरोसील की कुल 1000 बॉटल और ब्रॉण्‍डेड कंपनियों की खाली प्रिंटेड बोरियॉ काफी मात्रा में पायी गई। इसमें एनपीके 20.20.00.13 ब्राण्ड की इण्डियन पोटाश लि.मि. की लगभग 400 बोरियॉ, 18:46:0 इफको की 1200 बोरियों, किसान पावर एनपीके 12:32:16 ऑर्गेनिक फर्टीलाईजर की 1500 बोरियों आनंद छाप किसान की पहली पसंद सुपर दानेदार निर्माता कम्पनी कविता बायो फर्टीजाईजर परमालकसा जिला- राजनांदगाँव की 50 बैग, चिन्नुर सीड्स प्रोड्यूसर कम्पनी लि.मि. वार्ड 21 सर्किट हाऊस रोड़ बालाघाट की 100 बैग, रतनदीप पेडी सीड्स सावंगी तहसील-वारासिवनी, जिला-बालाघाट की 150 बैग का अवैध भण्डारण करना पाया गया।

आवश्‍यक वस्‍तु अधिनियम और बीज अधिनियम के अलावा कई प्रावधानों में प्रकरण दर्ज

गुरुवार देर शाम को हुई इस कार्यवाही के बाद शुक्रवार को कृषि विभाग द्वारा एफआईआर दर्ज कराने के लिये वारासिवनी थाने में प्रतिवेदन प्रस्‍तुत किया गया। प्रतिवेदन में ग्राम नरोड़ी एग्रीजोन के संचालक श्री अजय कटरे और खैरलांजी तहसील में खरखड़ी के निवासी पौरूष भगत के अलावा जुबीलैंट एग्री एंड कंज्‍यूमर प्रा.लि चित्‍तौगढ़ व कविता बायो फर्टिलाईजर राजनांदगांव पर एफआईआर दर्ज कराने के लिये उल्‍लेख किया गया है। प्रतिवेदन में भारतीय न्‍याय संहिता 2023 की धारा-318(4), धारा-3(5), आईपीसी की धारा-420 आवश्‍यक वस्‍तु अधिनियम 1955 की धारा-3 व 7, उर्वरक नियंत्रण आदेश 1885 की धारा-7,8,35 व 19, बीज अधिनियम 1966, बीज नियंत्रण आदेश 1983 की धारा-9 तथा कीटनाशीं अधिनियम 1971 की धारा-3, 13 व धारा-10(1)(डी) का स्‍पष्‍ट उल्‍लंघन करने का उल्‍लेख किया गया हैं।   


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July 11, 2024   

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विकासखंड स्तरीय, जिला स्तरीय व राज्य स्तरीय सर्वोत्तम कृषकों को …


सर्वोत्‍तम कृषक के लिये 31 अगस्त तक आवेदन आमंत्रित

बालाघाट :-

सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन "आत्मा" अंतर्गत, जिला स्तरीय व राज्य स्तरीय एवं विकासखंड स्तरीय सर्वोत्तम कृषक तथा सर्वोत्तम कृषक समूह का वर्ष 2024-25 के लिये प्रविष्टियां आमंत्रित की जा रही है। आवेदन का प्रारूप संबंधित विकासखंड के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के कार्यालय में ब्लाक टेक्नालाजी मैनेजर से प्राप्त किया जा सकता है। आवेदन जमा करने की अंतिम दिनांक 31 अगस्त 2024 को शाम 5:30 बजे तक होगी। कृषको से अपील की गई है कि आवेदन फार्म को अपने क्षेत्र के विषय वस्तु विशेषज्ञ एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से सत्यापित कराकर ही जमा करें। साथ ही संबंधित गतिविधियों जैसे उपज, विक्रय रसीद, परमिट की छायाप्रति इत्यादि का प्रमाण (वर्ष 2023-24 के) भी प्रस्तुत करें। आवेदन फार्म के साथ कृषक समूह को स्वयं का फोटो मोबाइल नम्बर, दूरभाष नम्बर, बैंक का नाम, ब्रांच का नाम, एकाउंट नम्बर, आईएफएससी कोड, आधार कार्ड की छायाप्रति देनी अनिवार्य होगी। आवेदन बिना साक्ष्य के पाये जाने व अपूर्ण भरे जाने पर समिति द्वारा निरस्त किये जायेंगे। सर्वोत्तम कृषक व समूह की चयन प्रकिया जिला स्तर पर कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में समिति तैयार कर समिति द्वारा निर्धारित प्राप्तांकों के आधार पर की जायेंगी।

सर्वोत्तम कृषक समूह को मिलेगा बीस हजार 

परियोजना संचालक ‘आत्‍मा’ से प्राप्‍त जानकारी अनुसार विकासखंड स्तरीय, जिला स्तरीय व राज्य स्तरीय सर्वोत्तम कृषकों के लिये पुरस्कार राशि क्रमशः 10000, 25000 व 50000 रुपये एवं सर्वोत्तम कृषक समूह को 20000 रुपये की राशि पुरस्कार देने का प्रावधान निर्धारित किया गया है।


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July 11, 2024   

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किसानों के हित में है नैनो यूरिया व डीएपी - …


सहकार से समृद्धि संगोष्ठी सम्पन्न

बालाघाट :- सहकार से समृद्धि समीक्षा सह-सहकारी संगोष्ठी व सहकारी सम्मेलन का आयोजन गुरुवार को गोंदिया रोड स्थित लॉन में इंडियन फारमर्स फर्टिलाईजर कोआपरेटिव लिमिटेड द्वारा किया गया। सहकारी सम्मेलन की अध्यक्षता डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने की। कार्यक्रम में बैंक प्रशासक आरसी पटले सीईओ जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक, आर.के मिश्रा डीजीएम विपणन इफको जबलपुर, डॉ. आरएल राउत प्रमुख राणा हनुमान सिंह कृषि विज्ञान एवं अनुसंधान केन्द्र बढ़गांव, राजेश खोब्रागढ़े डीडीए बालाघाट, अनिल बिरला इफको क्षेत्रीय अधिकारी सिवनी, पी.जोशी प्रबंधक लेखा, वैदिक अगाल इफको क्षेत्रीय अधिकारी बालाघाट मंच पर उपस्थित रहे।

इस अवसर पर कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने कहा कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के हित में है सरकार द्वारा भी नैनो प्रोडेक्ट को लेकर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। डॉ. मिश्रा ने उपस्थित जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित अंतर्गत शाखाओं के शाखा प्रबंधको, समिति प्रबंधको, खाद प्रभारियों और कृषि अधिकारियों से आव्हान किया कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी से होने वाले फायदो की जानकारी किसानो तक पहुंचाये ताकि किसान इसकी गुणवत्ता को समझे। डॉ. मिश्रा ने कहा कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग मेरे द्वारा पौधो में किया गया है। जिसका रिजल्ट बेहतर है। इसके अलावा डॉ. मिश्रा ने कहा कि जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित, बालाघाट के अधिकारी और कर्मचारियों के कार्य लगन का प्रतिफल है कि यह बैंक प्रदेश में उत्कृष्ठ कार्य कर रहा है।

सहकारी सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए बैंक सीईओ आरसी पटले ने कहा कि जिस उद्देश्य को लेकर कार्य करते है उसको शत प्रतिशत पूर्ण करना चाहिए। पैक्स समिति द्वारा किसानो के हित में कार्य करती है और समितियों को बेहतर बनाने और आय के स्त्रोत बढ़ाने के लिए सफल प्रयास किये जा रहे है, जिससे समिति और किसानो दोनो को लाभ होगा। जो किसान अपने कार्य के लिए शहर या अन्य स्थान जाता है। वह अब समितियों में ही अपना कार्य करवा पायेगा। श्री पटले ने कहा कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के महत्व को समझे वर्तमान में प्रतिस्पर्धा के इस दौर में यह किसानो के लिए कारगर है। किसानो तक इसे पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास करे। ताकि इसका लाभ किसानो को मिल सके। इसके अलावा श्री पटले द्वारा बैंकिंग कार्यो की समीक्षा करते हुए अमानत संग्रहण, ऋण वितरण, मध्यमकालीन ऋण, वसूली, पैक्स ऑन लाईन, कृषक समृद्धि केन्द्र, कॉमन सर्विस सेंटर सहित अन्य विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई।

इस अवसर पर डॉ. आर.एल. राउत, राजेश खोब्रागढ़े, आर.के. मिश्रा द्वारा भी नैनो यूरिया और नैनो डीएपी को लेकर विशेष जानकारी से अवगत कराया गया। इस दौरान माइक्रो एटीएम के संचालन का लाईव प्रदर्शन किया गया साथ ही कृषक समृद्धि केन्द्र अंतर्गत पेक्स समितियों को इफको द्वारा सामग्री प्रदाय कर चयनित समितियों को उत्कृष्ट कार्य किये जाने को लेकर कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने प्रमाण पत्र और शिल्ड देकर सम्मानित किया। सहकारी सम्मेलन में राजेश नगपुरे फिल्ड अधिकारी, सारंग बिसेन, रौनक चौकसे, प्रकाश साहू, दीपक देशमुख, व्ही.पी. मिश्रा, सुनील राहंगडाले, अनिरूद्ध वागदे, राजेश दुबे, ऋषि हरिनखेड़े, मोरेश्वर फुंडे, दिनदयाल ठाकरे, वाय.आर. बारमाटे, मनोहरलाल यादव, युवराज चौधरी, हीरालाल टेंभरे सहित संस्था प्रबंधक, खाद प्रभारी आदि उपस्थित रहे।


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Chandrawar Media Service

July 11, 2024   

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पीएम फसल बीमा योजना में बालाघाट जिले की 14 फसलें …


मसूर का 12 हजार व कोदो-कुटकी का 14 हजार में होगा बीमा

प्रधानमंत्री फसल बीमा अंतर्गत भारत शासन के कृषि मंत्रालय ने फसलों को अधिसूचित करने सम्बंधी राजपत्र प्रकाशित कर दिया है। प्रकाशित राजपत्र के अनुसार बालाघाट जिले के लिए रबी की फसल मसूर 12 हजार और खरीफ की फसल कोदों-कुटकी का 14 हजार रुपये प्रति हेक्‍टेयर बीमा किया जा सकेगा। इनके अलावा खरीफ की फसलों में धान सिंचित के लिए बीमित राशि प्रति हेक्टेयर 46000 रुपये, असिंचित धान के लिए 38000, सोयाबीन के लिए 26000, मक्का के लिए 22000 और अरहर के लिए 26000, मूंगफली के लिए 26000, मूंग 24000 और उड़द के लिए 24000 रुपये प्रति हेक्टेयर बीमा की राशि निर्धारित की गई।

रबी के फसलों में

प्रकाशित राजपत्र के अनुसार रबी की फसलों में सिंचित गेंहू के लिए 38000, असिंचित के लिए 28000, चना के लिए 29000, राई सरसो के लिए 27500 और अलसी के लिए 19000 रुपये बीमा राशि प्रति हेक्टेयर निर्धारित की गई है।


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Avinash Kumare

July 8, 2024   

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Pradhan Mantri Pik Vima Yojana: फक्त याच पिक्कांना मिळणार नुकसान …


Pradhan Mantri Pik Vima Yojana: महाराष्ट्र राज्य शासनाने केवळ एक रुपयात पीक विमा योजना खरीप हंगाम 2024 लागु केली असुन त्याची नोंदणी राष्ट्रीय पीक विमा पोर्टलवर सुरु आहे. शेतकरी बांधव www.pmfby.gov.in वर लॉगिन करून पीक विम्यात सहभाग नोंदवु शकतात. प्रधानमंत्री पीक विमा योजना कर्जदार किंवा बिगर कर्जदार शेतकऱ्यांसाठी ऐच्छिक असली तरी विमा हप्ता नाममात्र एक रुपया इतका कमी असल्याने सर्व शेतकरी बांधवानी त्याचा लाभ घ्यावा, असे आवाहन करण्यात येत आहे.

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आजच आपल्या जवळच्या CSC VLE नामित बँका येथे ही पीक विमा नोंदणी करता येते. नोंदणीची अंतिम तारीख 15 जुलै 2024 असली तरी शेवटच्या दिवसांतील गर्दी टाळण्यासाठी शेतकऱ्यांनी त्वरीत सहभाग नोंदवावा. भाडेपट्टीने शेती करणाऱ्या शेतकऱ्यांना पीक विमा योजनेत भाग घेता येईल. त्यासाठी नोंदणीकृत भाडे करार पोर्टलवर अपलोड करावा लागेल.

भात (धान), खरीप ज्वारी, बाजरी, नाचणी (रागी), मुग, उडीद, तूर, मका ही तृणधान्ये व कडधान्ये तसेच भुईमुग, कारळे, तीळ, सूर्यफुल, सोयाबीन ही गळीत धान्ये पीके आणि कापुस, खरीप कांदा ही नगदी पीके अधिसुचित मंडळ किंवा तालुका स्तरावर पीक विमा करण्यास पात्र आहेत.

 

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Pradhan Mantri Pik Vima Yojana: असा आहे उद्देश

  • पिकांच्या नुकसानीच्या वेळात शेतकऱ्यांचे आर्थिक स्थैर्य अबाधित राखणे.
  • नावीन्यपूर्ण व सुधारित मशागतीने तंत्रज्ञान व सामग्री वापरण्यासाठी प्रोत्साहन देणे.
  • कृषी क्षेत्रासाठीच्या पतपुरवठ्यात सातत्य राखणे.
  • उत्पादनातील जोखर्मीपासून शेतकऱ्यांच्या संरक्षणा बरोबरच अन्नसुरक्षा पिकांचे
  •  विविधीकरण आणि कृषी क्षेत्राचा गतिमान विकास करणे.
  • स्पर्धात्मकतेत वाढीचा उद्देश साध्य होण्यासाठी मदत होणार आहे.

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Pradhan Mantri Pik Vima Yojana: या नुकसानींना मिळणार भरपाई

  • हवामान घटकांचा प्रतिकुल परिस्थितीमुळे पिकाची पेरणी न झाल्यामुळे होणारे नुकसान.
  •  हंगामात हवामानातील प्रतिकुल परिस्थितीमुळे होणारे नुकसान.
  • पीक पेरणीपासुन काढणी पर्यंतच्या कालावधीतील नैसर्गिक आग.
  • वीज कोसळणे, गारपीट.
  • वादळ, चक्रीवादळ, पुरामुळे पीकक्षेत्र जलमय होणे (भात पीक वगळून)
  • भुखलन, दुष्काळ पावसातील खंड, कीड व रोग आदी बाबींमुळे उत्पन्नात होणारी घट.
  •  स्थानिक नैसर्गिक आपत्तीमुळे पिकांचे होणारे नुकसान.

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Sajit Tekam

July 8, 2024   

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Organic Fruits: सावधान! या 5 फळांसोबत पोटात जात आहे हे …


Organic Fruits: फळे आणि भाज्या आपल्या रोजच्या आहारात सकस मानल्या जातात. ह्यांचा समावेश केल्यामुळे आपण आवश्यक पोषक तत्वे मिळवतो. पण, बाजारातील काही फळे आणि भाज्यांमध्ये घातक रसायनांचा वापर केल्यामुळे त्यांचे सेवन आरोग्यासाठी धोकादायक ठरू शकते.

 

Organic Fruits: सिझन संपला तरी उपलब्ध फळे

सिझन संपल्यानंतर देखील सफरचंद, द्राक्षे आणि इतर फळे बाजारात मिळत असतात. ही फळे शीतगृहात ठेवून त्यांचे आयुष्य वाढवले जाते. मात्र, ह्याच काळात डीडीटी, इथरेल आणि जिब्रालिक सारख्या रसायनांचा वापर करून फळांचे आयुष्य वाढवले जाते, ज्यामुळे आपले आरोग्य धोक्यात येऊ शकते.

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Organic Fruits: घातक रसायनांचे दुष्परिणाम

  • त्वचेचे विकार
  • डायबेटिस
  • पीसीओडी
  • चष्मा लागणे
  • एकाग्रता कमी होणे
  • तणाव वाटणे
  • भूक न लागणे
  • डोळ्यांभोवती काळा पट्टा
  • कॅन्सर
  • अस्थमा 

 

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Organic Fruits: सुरक्षितता उपाय

आपले आरोग्य सुरक्षित ठेवण्यासाठी, फळे खाण्याआधी ती कमीत कमी तीन तास पाण्यात बुडवून ठेवा. मोसमात येणाऱ्या फळांचे सेवन करण्यास प्राधान्य द्या आणि हायब्रीड फळांचा वापर कमीत कमी करा.

 

Organic Fruits: कीटकनाशके आणि त्यांचा वापर

अनेक वैज्ञानिक अभ्यासांनी दाखवून दिले आहे की बाजारात विकल्या जाणाऱ्या शेकडो फळांमध्ये ३०% पेक्षा अधिक प्रमाणात कीटकनाशके असतात. हे कीटकनाशके एका विशिष्ट मर्यादिपेक्षा जास्त प्रमाणात वापरल्यास मोठ्या आजारांना आमंत्रण ठरते.

 

फळे आणि भाज्यांमध्ये घातक रसायनांचा वापर: वारंवार विचारले जाणारे प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: फळे आणि भाज्यांमध्ये कोणते घातक रसायनांचा वापर केला जातो?
उत्तर: बाजारात विकण्यासाठी फळे टिकवण्यासाठी आणि पिकवण्यासाठी डीडीटी, इथरेल आणि जिब्रालिक सारख्या घातक रसायनांचा वापर केला जातो.

प्रश्न 2: या रसायनांचा वापर का केला जातो?
उत्तर: फळांचे आयुष्य वाढवण्यासाठी, ती लवकर खराब होऊ नयेत आणि विक्रीसाठी ताजीतवानी राहावीत म्हणून या रसायनांचा वापर केला जातो.

प्रश्न 3: घातक रसायनांचा वापर केल्याने कोणते आरोग्याचे धोके आहेत?
उत्तर: त्वचेचे विकार, डायबेटिस, पीसीओडी, चष्मा लागणे, एकाग्रता कमी होणे, तणाव वाटणे, भूक न लागणे, डोळ्यांभोवती काळा पट्टा, कॅन्सर आणि अस्थमा होण्याची भीती आहे.

प्रश्न 4: बाजारात विकल्या जाणाऱ्या फळांमध्ये किती प्रमाणात कीटकनाशके असतात?
उत्तर: अनेक वैज्ञानिक अभ्यासानुसार, बाजारात विकल्या जाणाऱ्या शेकडो फळांमध्ये ३०% पेक्षा अधिक प्रमाणात कीटकनाशके आढळतात.

प्रश्न 5: फळे खाण्यापूर्वी कोणती काळजी घ्यावी?
उत्तर: फळे खाण्यापूर्वी कमीत कमी तीन तास पाण्यात बुडवून ठेवावीत. मोसमात येणाऱ्या फळांचे सेवन करण्यास प्राधान्य द्यावे आणि हायब्रीड फळांचा वापर कमीत कमी करावा.

प्रश्न 6: मोसमात येणाऱ्या फळांचे सेवन का महत्वाचे आहे?
उत्तर: मोसमात येणाऱ्या फळांमध्ये नैसर्गिक पोषक तत्वे आणि ताजेपणा अधिक असतो. त्यांचे सेवन केल्याने आरोग्यासाठी फायदेशीर असते आणि घातक रसायनांचा धोका कमी होतो.

प्रश्न 7: फळांमध्ये घातक रसायनांची उपस्थिती कमी करण्यासाठी आणखी काय उपाययोजना करता येईल?
उत्तर: जैविक (ऑर्गेनिक) पद्धतीने उगवलेल्या फळांचे सेवन करावे. स्थानिक उत्पादकांकडून ताजी फळे खरेदी करावी. फळांची साल काढून खावी आणि फळे चांगली धुवून खावी.

प्रश्न 8: हायब्रीड फळांचा वापर का टाळावा?
उत्तर: हायब्रीड फळांमध्ये रासायनिक प्रक्रिया अधिक प्रमाणात केली जाते, ज्यामुळे त्यांच्यात घातक रसायनांची उपस्थिती अधिक असते. त्यामुळे त्यांचा वापर कमीत कमी करावा.

प्रश्न 9: घातक रसायनांमुळे होणारे आजार कसे ओळखावे?
उत्तर: त्वचेचे विकार, डोळ्यांभोवती काळा पट्टा, तणाव वाटणे, भूक न लागणे, आणि इतर आरोग्य समस्या जाणवू लागल्यास डॉक्टरांचा सल्ला घ्यावा.

प्रश्न 10: घातक रसायनांचा वापर कमी करण्यासाठी शेतकरी काय करू शकतात?
उत्तर: शेतकऱ्यांनी जैविक शेतीकडे वळावे, नैसर्गिक कीटकनाशकांचा वापर करावा आणि कमी रसायनांचा वापर करून उत्पादन वाढवण्याचे तंत्रज्ञान वापरावे.

 


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SHAMAN

July 5, 2024   

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Agriculture: सावधान ! रासायनिक खतांचा अतिवापर ठरू शकतो धोकादायक


Agriculture: रासायनिक खतांचा जास्त आणि सातत्याने वापर केल्यामुळे जमिनीचा पोत बिघडतो. परिणामी जमिनीची उत्पादकता कमी होते. खतांचा वापर अधिक करावयाचा झाल्यास पिकांना पाणीही मोठ्या प्रमाणावर द्यावे लागते. साहजीकच त्यामुळे जमिनीतील क्षारांचे प्रमाण वाढते. त्यामुळे रासायनिक खतांचा अतिवापर करणे धोक्याचा असल्याचे बोलल्या जात आहे.

आज मोठ्या प्रमाणावर वाढत चाललेला रासायनिक खतांचा वापर आणि घटत चाललेली अन्न धान्याची गुणवत्ता, माणसाच्या आरोग्यावर होणारे घातक परिणाम, निसर्गावर होणारे वाईट परिणाम या सर्व गोष्टींकडे लक्ष दिले, तर रासायनिक शेती ही किती धोकादायक आहे हे आपल्याला समजुन येते.

हे देखील वाचा : Types Of Organic Farming: शेतकऱ्यांनो, कीटकनाशक फवारणी या पिकांवर नको ?

रासायनिक खतांचा वाढता वापर घातक आहे. शेतीत पिकणारा भाजीपालाच आज न मोठ्या प्रमाणात 'बाजारात विक्रीसाठी येत असतो. परंतु रासायनिक खतांचा वापर केलेल्या या पिकांचा मानवी आरोग्यावर परिणाम होतांना आज दिसून येत आहे.

बाजारात विकण्यासाठी येणाऱ्या पालेभाज्यांवर रासायनिक खतांचा सर्रास वापर होतो. नागरिकही बाजारातून या भाजीपाल्याची खरेदी करतात. याचा परिणाम नागरिकांच्या आरोग्यावर होत असतो. या पिकांमुळे नागरिकांमध्ये पोलिओ कर्करोग आदी विविध आजारांना सामोरे जावे लागते असे तज्ज्ञ सांगतात, रासायनिक खतांप्रमाणे कीटकनाशकांच्या वापराचेदेखील अनिष्ट परिणाम होत असल्याचे दिसून आले आहे.

हे देखील वाचा : Organic Farming: जैविक खेती क्या है, प्रकार, महत्व, लाभ और हानि, जानिए भारत में जैविक खेती कैसे करें

कीटकांचा नाश करणारी कीटकनाशके अर्थातच विषारी असतात. त्यामुळे ज्याप्रमाणे उपद्रवकारक कीटक मरतात त्याचप्रमाणे काही उपयुक्त जीवजंतूही बळी पडतात. खर तर निसर्गाने स्वतःच खूप काही गोष्टीचा समतोल साधण्याची व्यवस्था केलेली आहे. निसर्गाने ज्याप्रमाणे पिलांना उपद्रवकारक कीटक असतात, त्याचप्रमाणे या कीटकांवर उपजीविका करणारेही काही कीटक पक्षी प्राणी असतात. रासायनिक खतांच्या वापरातून जमिनीवर दुष्परिणाम होता. या खतांच्या पिकांच्या दर्जावर व पर्यायाने आपल्या आरोग्यावर होणारे दुष्परिणाम होतांना दिसून येतात. त्यामुळे सावध राहण्याची गरज "व्यक्त होत आहे.

 


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MK CREATION

July 4, 2024   

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Pm Kisan Yojana 2024 : PM किसान योजनेत होणार बदल, …


Pm Kisan Yojana 2024 : भारताला कृषीप्रधान देश म्हटले जाते. कारण देशाची अर्ध्या पेक्षा अधिक लोकसंख्या शेतीवर अवलंबून आहे. त्यामुळे केंद्र व राज्य शासनामार्फत देशातील शेतकऱ्यांसाठी विविध योजना राबविण्यात येत आहेत. अशीच एक योजना पंतप्रधान किसान सन्मान निधी योजना आहे. ही केंद्र सरकार तर्फे राबवण्यात येणारी योजना असल्याने याचा फायदा केवळ महाराष्ट्रातील शेतकऱ्यांनाच नाही तर संपूर्ण देशातील शेतकऱ्यांना होत आहे. ही योजना फेब्रुवारी 2019 मध्ये सुरू झाली आणि तेव्हापासून ती सतत चालू आहे.

या अंतर्गत पात्र शेतकऱ्यांना 6000 रुपयांची वार्षिक मदत दिली जात आहे. शेतकऱ्यांना शेती करण्यासाठी मदत व्हावी म्हणून ही योजना केंद्र सरकार ने सुरु केली आहे.

या योजनेत दिलेली रक्कम एकरकमी शेतकऱ्यांना दिली जात नाही. हे पैसे केंद्र सरकार  प्रत्येकी 2000 रुपयांचा एका हप्ता या प्रमाणे थेट शेतकऱ्याच्या बँक खात्यात जमा केले जातात.

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सतरावा हफ्ता खात्यात जमा

या योजनेद्वारे आतापर्यंत एकूण 17 हफ्ते पात्र लाभार्थ्यांना प्राप्त झाले आहेत. 17 वा हप्ता काही दिवसांपूर्वीच शेतकऱ्यांच्या खात्यावर जमा करण्यात आला आहे.

या योजनेद्वारे आतापर्यंत एकूण 17 हफ्ते पात्र असलेल्या सर्व शेतकऱ्यांना  मिळालेले आहेत. नरेंद्र मोदी  नी पंतप्रधान पदाची शपथ घेतल्या घेतल्या 17 व्या हफ्त्याची रक्कम शेतकऱ्यांच्या बँक खात्यात जमा केल्या गेली. परंतु, आता या योजनेबाबत एक मोठी माहिती समोर आली आहे. केंद्र सरकार या योजनेत मात्र काही बदल करु शकते.

प्राप्त झालेल्या माहितीनुसार, या योजनेंतर्गत मिळणारी 6000 (सहा हजार) रुपयांची रक्कम ही आता वाढवुन दिल्या जान्याची शक्यता आहे. या योजने मार्फत मिळणारा निधी हा पुरेसा नसल्याने हा निधी वाढवून द्यावा अशी मागणी गेल्या काही महिन्यांपासून होत आहे.

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6000 रुपयांमध्ये होणार आणखी 2000 रुपयांची भर

पी एम किसान सम्मान निधी या योजने अंतर्गत शेतकऱ्यांना 6000 रूपये दिल्या जात आहेत. या रकमेत 2000 रुपयांची भर करून ही रक्कम वार्षिक 8000 रुपये इतकी होऊ शकते. असे सांगितल्या जात आहे.

या बाबत केंद्रीय अर्थमंत्री निर्मला सीतारामन यांच्याकडे मागणी करण्यात आली आहे. अशा परिस्थितीत केंद्रातील मोदी सरकार तिसऱ्यांदा सत्तेत आल्यानंतर पी एम किसान योजनेची रक्कम वाढवणार की नाही हे पाहणे उत्सुकतेचे ठरणार आहे.


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Sanket dhoke

July 4, 2024   

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Agriculture News :- नागपूरात कोथिंबीरच्या दरात तेजी, तर अमरावतीत दबावात


Agriculture News :- कोथिंबीरच्या मागणीत वाढ आणि तुलनेत कमी पुरवठा यामुळे विदर्भातील बहुतांश भाजी मार्केटमध्ये कोथिंबिरीच्या दरात वाढ झाली आहे.

Amrawati च्या फळ व भाजीपाला बाजारात कोथिंबिरीची 7000 ते 10000 रुपये प्रतिक्विंटल उलाढाल झाली. आता कोथिंबिरीचा भाव चार हजार ते सहा हजार रुपयांवर आला आहे. मात्र Nagpur च्या कळमना मार्केटमध्ये 8 हजार ते 10 हजार रुपये दर होते. बाजारात कोथिंबिरीची आवक 20 क्विंटलपर्यंत घटली आहे.


Amrawati च्या बाजारपेठेवर नजर टाकली तर गेल्या आठवड्यात येथे कोथिंबीर 6000 ते 8000 रुपयांना विकली गेली. यावेळी घरगुती आवकही 20 क्विंटल झाली. यानंतर शुक्रवारपर्यंत (दि. 28) दर सुधारत 7000 ते 10000 रुपयांवर पोहोचले.

 आता Amrawati बाजारात कोथिंबीरीच्या दरावर दबाव आहे. येथे चार हजार ते सहा हजार रुपयांपर्यंत व्यवहार होत असल्याचे व्यावसायिक सूत्रांनी सांगितले.

Nagpur च्या कळमना बाजारात आवक 200 क्विंटलवर स्थिर असली तरी दरात मोठी चढ-उतार पाहायला मिळत आहे. जून महिन्याच्या सुरुवातीला या बाजारात कोथिंबिरीचा भाव 6000 ते 10000 रुपये होता.

 यानंतर काही काळ 6000 ते 8000 रुपयांचे व्यवहार झाले. जूनच्या पंधरवड्यात 4,000 ते 10,000 रुपये मिळायचे. व्यावसायिक सूत्रांनी दिलेल्या माहितीनुसार, कोथिंबीर 6000 ते 9000 रुपये आणि काही दिवसांनी 7000 ते 12000 रुपयांवर व्यवहार करत आहे.

 कळमना बाजारात सध्या कोथिंबिरीची आवक आठ ते दहा हजार रुपयांनी होत असल्याचे सांगण्यात आले.

 

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Bahujnancha Buland Aawaj

July 3, 2024   

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कृषी पंप धारकाचे थकित विज बिल माफ ! तर मग …


महाराष्ट्र सरकारने कृषी पंप धारकांचे थकीत वीज बिल माफ करण्याचे पावसाळी अधिवेशनात घोषणा केली.हे राज्यातील शेतकऱ्यांसाठी महत्त्वाची बाब आहे.राज्यातील शेतकऱ्यांना आनंदच झाला आहे परंतु सरकारने जशी थकीत वीज बिल माफीची घोषणा केली,हे जरी खरं असलं तरी,त्या घोषणेची अंमलबजावणी होणे हेही तितकच महत्त्वाची बाब आहे.

राज्यातील सरकारचे धोरण जनतेला माहित आहे आणि आत्ताच झालेल्या लोकसभा निवडणुकीमध्ये राज्यातील जनतेने दाखवून दिले आहे आणि त्यामुळेच उशिरा का होईना पण सरकारला सूध जावून बुध आली,असं म्हणायला काहीही हरकत नाही.

पण काही का ? असेना.राज्यातील कृषी पंप धारकांची एवढीच अपेक्षा आहे की थकीत विज बिल माफीचा जी.आर. काढून लवकरात लवकर अंमलबजावणी व्हायला पाहिजे हीच शेतकऱ्यांची अपेक्षा आहे.

वीज बिलाचा भरणा केलेला नाही म्हणून कित्येक शेतकऱ्यांची लाईट कापल्या गेली आहे.विज बिल भरू शकत नाही,एवढी बिकट अवस्था राज्यातील शेतकऱ्यांची आहे.म्हणून लवकरात लवकर अंमलबजावणी झाली तर आपली कापल्या गेलेली कनेक्शन जोडल्या जाईल अशी आशा शेतकऱ्यांनी व्यक्त केली आहे.


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Avinash Kumare

July 2, 2024   

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Types Of Organic Farming: शेतकऱ्यांनो, कीटकनाशक फवारणी या पिकांवर नको …


Types Of Organic Farming: उत्पादन वाढीच्या दृष्टिकोनातून सध्या रासायनिक खतांचा आणि कीटकनाशकांचा वापर करण्यात येतो. यामुळे उत्पादन वाढले जात असले तरी पिकात रासायनिक अर्क राहत असतो. खाण्यात हा अर्क पोटात जात असतो. त्यामुळे आरोग्याची समस्या भेडसावण्याची शक्यता असते. त्यामुळे कीटकनाशकांऐवजी गोमूत्र, दशपर्णी, निंबोळी अर्काची फवारणी करावी, असे आवाहन कृषी विभागाने केले आहे.

 

Types Of Organic Farming: फवारणी करताना अशी घ्या काळजी?

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  • एकच कीटकनाशक दोनपेक्षा जास्त वेळा नको : कोणतेही पीक असो परंतु, एकच फवारणी करा कीटकनाशक दोनपेक्षा अधिक वेळा फवारणी करू नये.
  • पीक या अवस्थेत झाल्यानंतर फवारणी करावी : पिके पेरणीच्या दुसया टप्प्यात आल्यानंतर त्याची योग्य पद्धतीने व कृषी विभागाच्या सल्ल्याने फवारणी करावी.
  • सुरक्षेची घ्या काळजी : तणनाशके फवारणीचा पंप चुकूनही कीटकनाशक फवारणीसाठी वापरु नये. फवारणी करताना संरक्षक कपडे, बूट, हातमोजे, नाकावरील मास्क आदींचा वापर करावा.

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एकात्मिक कीड व्यवस्थापन Integrated Pest Management: प्रत्येकाने एकात्मिक कीड व्यवस्थापन पद्धतीचा अवलंब करायला हवा. एकात्मिक कीड व्यवस्थापनामध्ये वातावरणाशी समन्वय साधून किडींची संस्था आर्थिक नुकसान पातळी खाली ठेवली जाते.

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Types Of Organic Farming: निंबोळी अर्काची फवारणी करा

शेतातील पिकांवर औषधांची फवारणी करताना घरगुती उपाय वापरावेत. त्याचबरोबर निंबाचा अर्क एकत्र करून पिकांवर फवारणी करावी.

 

Types Of Organic Farming: शुद्ध पाण्याचा वापर करा

कोणत्याही पिकावर फवारणी करण्यासाठी शुद्ध पाण्याचा वापर करावा. पाण्याचे पीएच 5.50 6.50 असेल, अशाच पाण्याचा वापर करावा. दूषित पाण्याचा वापर केल्यास रिझल्ट भेटत नाही.

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News ka pithara

July 2, 2024   

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विद्युत प्रवाहाने तरुणाचा मृत्यू


 गडचिरोली, ब्युरो. मामाच्या शेताला कुंपण करण्याकरिता झाडाच्या फांद्या तोडत असताना फांदी विद्युत तारांवर पडली. विद्युत तारांवरील प्रवाह ओल्या फांदीत प्रवाहित झाल्याने तरुणाला जोरदार विजेचा शॉक बसला. यातच त्याचा मृत्यू झाला. सदर घटना चामोर्शी तालुक्याच्या कोनसरी येथे 29 जून रोजी सकाळी 7.30 वाजताच्या सुमारास घडली. करण प्रमोद गुरुनुले (18) रा. कर्दुळ (घोट) असे मृतक तरुणाचे नाव आहे.

प्राप्त माहितीनुसार, करण गुरूनुले हा आठवड्यापूर्वीच कोनसरी येथे मामाच्या गावाला आला होता. शनिवारी, मामाच्या शेतात कुंपण करण्यासाठी तो झाडाच्या फांद्या तोडत

असताना फांदी विद्युत लाइनच्या तारांवर कोसळली. त्याने ती फांदी काढण्याचा प्रयत्न केला असताना त्याला विजेचा जोरदार शॉक लागून तो खाली कोसळला. त्यामुळे तो बेशुद्ध झाला. सोबतच्यांनी त्याला कोनसरी येथील आरोग्य केंद्रात उपचारासाठी हलविले. त्यानंतर त्याला चामोर्शी येथील ग्रामीण रुग्णालयात उपचारासाठी नेण्यात आले. परंतु, तपासणीनंतर डॉक्टरांनी त्याला मृत घोषित केले. घटनेची माहिती चामोर्शी पोलिसांना देण्यात आली. पोलिसांनी पंचनामा करून मृतदेह उत्तरीय तपासणीसाठी पाठविला. करण हा घोट येथील जि. प. महात्मा गांधी हायस्कूलमध्ये इयत्ता 12 वीला प्रविष्ट झालेला होता.


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Gadchiroli Varta News

July 1, 2024   

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दोटकुली गावात कृषी दिवस साजरा कृषी दिवसा निमित्त प्रभात फेरीचे …


दोटकुली गावात कृषी दिवस साजरा कृषी दिवसा निमित्त प्रभात फेरीचे आयोजन

केवळरामजी हरडे कृषी महाविद्यालय, चामोर्शी यांच्या तर्फे ग्रामीण उद्योजकता जागृती विकास योजनेतील विद्यार्थ्यांतर्फे ०१ जुलै २०२४ ला दोटकुली येथे कृषी दिवस आयोजित करण्यात आला. सदर कार्यक्रम महाविद्यालयाचे प्राचार्य श्री. डॉ. आदित्य कदम तसेच श्री. छबिल दुधबळे, श्री. प्रलय झाडे निकीता येलमुले मॅडम यांच्या मार्गदर्शनात अनुज हिंगाने, यश काले ,अजिंक्य केमये , अनुप लोणारे , गोपाल मंडल यांच्या द्वारे उत्तम रित्या कार्यक्रम आयोजित करण्यात आला. 

 

महाराष्ट्राचे माजी मुख्यमंत्री आणि हरित क्रांतीचे चे प्रणेते वसंतराव नाईक यांचा जन्मदिवस १ जुलै हा महाराष्ट्र कृषी दिवस म्हणून साजरा केला जातो. यांच्या कृषी क्षेत्रातील मोलाची आठवण म्हणून त्यांची जयंती महाराष्ट्र कृषी दिवस म्हणून साजरी केली जाते. अशी माहिती कृषी विद्यार्थ्यांनी दिली व कृषी दिवसा निमित्त प्रभात फेरीचे आयोजन करण्यात आले.

 

कार्यक्रमाप्रसंगी गावातील जि. प. उच्च प्राथमिक शाळा दोटकुली मुखध्यापक . घोडमारे सर, टेकाम सर, गव्हारे सर, नंदाताई चौधरी आणि .गावकरी मंडळी व लहान बालगोपाल उपस्थित होते. आणि कार्यक्रम सहजरीत्या पार पडला.


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Dipak Indurkar

June 28, 2024   

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Organic Farming: जैविक खेती क्या है, प्रकार, महत्व, लाभ और …


Organic Farming: क्या आपने सोचा है कि ऑर्गेनिक सब्जियाँ क्यों सुरक्षित और स्वादिष्ट होती हैं? जब हम खरीदारी करते हैं, तो हम अपने बच्चों की सेहत की सबसे ज्यादा चिंता करते हैं.

स्वादिष्ट भोजन हमें ऊर्जा देता है, और इसे हम भगवान का वरदान मानते हैं. जैविक खेती (Organic Farming) एक प्राकृतिक और पारंपरिक तरीका है, जो हमें स्वास्थ्यवर्धक आहार प्रदान करता है.

जैविक खेती में केवल प्राकृतिक सामग्री का उपयोग होता है, कीटनाशकों का नहीं. यह हमारे स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए फायदेमंद है भारत में कई योजनाएं हैं जो किसानों को इस दिशा में सहायता प्रदान करती हैं.

जैविक उत्पादों की मांग बढ़ रही है. लोग स्वस्थ आहार पसंद करने लगे हैं. जैविक खेती हमारे स्वास्थ्य के साथ-साथ पृथ्वी के लिए भी अच्छी है.

इस लेख में हम जैविक खेती के विभिन्न प्रकार, उनके लाभ और हानियों की चर्चा करेंगे. चलिए इस नई कृषि पद्धति के बारे में सीखते हैं.


जैविक खेती के प्रकार Types of organic farming

जैविक खेती कई तरीकों से की जा सकती है. इसमें प्राकृतिक विविधता और स्थान का ध्यान रखा जाता है। कुछ प्रमुख प्रकार हैं - प्राकृतिक खेती, जैविक उपाय, और संजीवनी खेती.

 

  • प्राकृतिक खेती: प्राकृतिक तत्वों का उपयोग कर फसलों को उच्च गुणवत्ता और सुरक्षा मिलती है.
  • जैविक उपाय: कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता, जिससे पर्यावरण को फायदा होता है.
  • संजीवनी खेती: प्राकृतिक तत्वों से पौधों की वृद्धि होती है और ये पौधे पुनर्जीवित होते हैं.

ये तरीके जैविक खेती के महत्वपूर्ण आयाम हैं. ये एक सुरक्षित खेती प्रणाली प्रदान करते हैं. किसान जैविक खेती के प्रकारों का उपयोग कर अपनी फसलों को स्वस्थ और प्राकृतिक बना सकते हैं.


जैविक खेती के लाभ Benefits of Organic Farming

जैविक खेती के बहुत से लाभ हैं. यह केमिकल खादों का उपयोग नहीं करती, जिससे उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ती है और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य उत्पन्न होते हैं.

  • विषाणु मात्रा कम होती है: इससे आप स्वस्थ खाद्य खा सकते हैं.
  • सूक्ष्मजीवों की सुरक्षा: ये मिट्टी की नमी बनाए रखते हैं.
  • भूमि की स्थिरता: इससे भूमि बरकरार रहती है और पर्यावरण को कोई हानि नहीं पहुंचती.
  • पर्यावरण संतुलन: जैविक खेती संतुलित पर्यावरण के लिए भी अच्छी है क्योंकि इसमें कीटनाशकों और हानिकारक तत्वों की कमी होती है.

भारत में जैविक खेती बहुत महत्व रखती है. ग्रामीण क्षेत्रों में इसे करना थोड़ा संकटपूर्ण था, लेकिन अब यह पूरे भारत में हो रही है. जैविक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है. यह आम लोगों के आहार में स्वास्थ्य बदलाव ला रही है और भारतीय किसानों को आर्थिक और सामाजिक लाभ भी मिल रहे हैं.


जैविक खेती के नुकसान Disadvantages of Organic Farming

जैविक खेती के लाभों के साथ नुकसान भी हैं. इसमें सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह ज्यादा समय और मेहनत मांगती है. यह कीट और रोगों की संभावना बढ़ा सकती है और इसका सामना करना कठिन हो सकता है.

जैविक उपायों के लिए समय भी लगता है. जैविक उत्पादों का अधिक मूल्य होना संभव है क्योंकि उनकी कम प्रतिस्पर्धा होती है और उनका अधिक आवेदन नहीं होता है.

समस्याएँ और समाधान

हानियों का हल तलाशने के लिए कई उपाय हैं. प्राकृतिक शस्त्रक्रिया और कीटनाशकों का उपयोग किया जा सकता है. प्राकृतिक आपातकालीन औषधियां भी मददगार साबित हो सकती हैं. जब तकनीक और ताजगी से युक्त जैविक खाद का इस्तेमाल हो, तो सुचारू जैविक खेती संभव है. इसके लिए स्थानीय उत्पादकों की मदद भी की जा सकती है.


जैविक खेती का महत्व Importance of Organic Farming

जैविक खेती आजकल कृषि क्षेत्रों में बहुत महत्वपूर्ण है. यह पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाती है। इस तरह, यह प्राकृतिक संसाधनों का अच्छे से उपयोग करती है. इसके साथ ही, यह कीटनाशकों और केमिकल का उपयोग नहीं करती.

जैविक खेती से जमीन की गुणवत्ता भी सुधरती है. क्योंकि इसमें कीटों और कीटाणुओं का संभावित प्रकोप कम होता है. यह हमारे किसानों की आमदनी में भी वृद्धि लाती है.


जैविक खेती की विशेषताएं Features of Organic Farming

जैविक खेती के कुछ महत्वपूर्ण पहलू हैं। यह स्वस्थ और टिकाऊ खेती पद्धति है. जैविक तरीके से खेती करते समय कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं किया जाता.

इसके कारण, उत्पादों की उत्पादकता बढ़ती है और प्राकृतिक खाद्य की मांग भी बढ़ जाती है। साथ ही, जैविक उत्पादों में कीटनाशकों और केमिकल की मात्रा कम होती है। इससे लोगों को अधिक स्वास्थ्यवर्धक खाद्य मिलता है.

  • उत्पादकता और स्वास्थ्य: जैविक खेती उच्च उत्पादकता और स्वास्थ्य के साथ फसलों का उपयोग करती है.
  • कीटनाशकों के अभाव: कीटनाशक नहीं होने से उत्पादकता की मात्रा बढ़ती है और अधिक विक्रय के अवसर पैदा होते हैं.
  • गुणवत्ता खाद्य: जैविक खेती से उत्पादित खाद्य में कीटनाशक और केमिकल की कम मात्रा होती है और यह लोगों को स्वास्थ्यवर्धक खाद्य की आपूर्ति प्रदान करता है.


FAQ

जैविक खेती क्या है?
जैविक खेती एक नेचुरल तरीके से खेती करने की प्रवृत्ति है. इसमें केवल नेचुरल सामग्री का उपयोग होता है। यह उत्तम उत्पादों की खेती को बढ़ावा देता है और पेस्टिसाइड का इस्तेमाल कम करता है.

जैविक खेती के कौन-कौन से प्रकार होते हैं?
कुछ प्रमुख जैविक खेती के तरीके शामिल हैं - प्राकृतिक खेती, जैविक उपाय, और संजीवनी खेती.

जैविक खेती के क्या लाभ हैं?
इसमें कीटनाशकों का नहीं होता है, जिससे उत्पादों में कीटनाशक बचत होती है. यह स्वास्थ के लिए भी बहुत ही फायदेमंद है.

जैविक खेती के हानियाँ क्या हैं?
कई कमियां हैं जैसे कीटों और रोगों से निपटना मुश्किल हो सकता है। साथ ही, यह प्रतिस्पर्धी शौकिनों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकते है.

जैविक खेती क्यों महत्वपूर्ण है?
जैविक खेती प्राकृतिक संसाधनों को सही तरीके से उपयोग करती है. यह पर्यावरण को बनाए रखने में मदद करती है.


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खबरदार महाराष्ट्र

June 23, 2024   

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पिक कर्ज वाटपाच्या प्रक्रियेची गती वाढवा पालकमंत्री ना. सुधीर मुनगंटीवार …


 

चंद्रपूर, दि. 22 : शेतकऱ्यांच्या दृष्टीने अतिशय महत्त्वाच्या असलेल्या खरीप हंगामाला सुरवात झाली आहे. या हंगामावरच शेतकऱ्यांचा संपूर्ण आर्थिक डोलारा उभा राहतो. पेरणीच्या वेळेस बियाणे, खते घेण्यासाठी शेतकऱ्यांना आज पीक कर्जाची अत्यंत गरज आहे. त्यामुळे पीक कर्ज वाटपाच्या प्रक्रियेची गती वाढवून शेतकऱ्यांना वेळेवर पैसे उपलब्ध करून द्यावेत, असे निर्देश राज्याचे वने, सांस्कृतिक कार्य, मत्स्यव्यवसाय मंत्री तथा जिल्ह्याचे पालकमंत्री सुधीर मुनगंटीवार यांनी आज (शनिवार) दिले.

नियोजन सभागृह येथे कृषी व कृषी संलग्न विभागासोबत खरीप हंगामाचा आढावा घेतांना ते बोलत होते. यावेळी जिल्हाधिकारी विनय गौडा जी.सी. मुख्य कार्यकारी अधिकारी विवेक जॉन्सन, जिल्हा अधिक्षक कृषी अधिकारी शंकर तोटावार, आत्माच्या प्रकल्प संचालीका प्रिती हिरुळकर, कृषी उपसंचालक चंद्रकांत ठाकरे, रामपालसिंग व विविध विभागाचे अधिकारी उपस्थित होते.

पीक कर्ज वाटपात विशेष लक्ष देणे गरजेचे आहे, असे सांगून पालकमंत्री श्री. मुनगंटीवार म्हणाले, शेतक-यांना वेळेवर कर्ज उपलब्ध होण्यासाठी बँकांनी विशेष शिबिर घेऊन कर्जवाटप करावे. कर्जवाटपासाठी बँकेत अतिरिक्त मनुष्यबळ नियुक्त करावे. राष्ट्रीयकृत बँकांची कर्जवाटपाची गती अतिशय कमी आहे. यात सुधारणा करावी. 20 ते 22 ग्रामपंचायती संलग्न असलेल्या एखाद्या बँकेत केवळ 80 शेतक-यांना कर्ज वाटप होत असेल तर ही अतिशय गंभीर बाब आहे. व्यवस्थापक किंवा एखाद्या संबंधित व्यक्ती उपलब्ध नसला तर सदर कार्यभार दुस-या कर्मचा-यांकडे सोपवून पीक कर्ज वाटपाची प्रक्रिया सोयीची करावी, असे निर्देश पालकमंत्री श्री. मुनगंटीवार यांनी बँकांना दिले. 

गतवर्षीपासून शासनाने 1 रुपयात प्रधानमंत्री पीक विमा योजना सुरू केली आहे. यापूर्वी केवळ 50 ते 60 हजार शेतकरी या योजनेत सहभागी होत होते. मात्र गतवर्षी जिल्ह्यातील जवळपास 3 लाख शेतकरी या योजनेत सहभागी झाले. ही चांगली बाब असल्याचेही ना. श्री. मुनगंटीवार म्हणाले. यावेळी पालकमंत्री श्री. मुनगंटीवार यांनी खरीप हंगाम 2024-25 चे नियोजन, बियाणे व खतांची उपलब्धता, गुणनियंत्रणाबाबत कार्यवाही, अनधिकृत कापूस बियाणे विक्रीविरुध्द कार्यवाही, प्रधानमंत्री पीक विमा योजना, 2023-24 मध्ये नैसर्गिक आपत्ती अंतर्गत खरीप व रब्बी मध्ये पिकांचे झालेल नुकसान, नुकसानभरपाईचे अनुदान वाटप, पीक कर्ज वाटप, प्रधानमंत्री किसान सन्मान निधी योजना, प्रलंबित कृषी पंप जोडणी यासोबतच आत्मा अंतर्गत राबविण्यात येणारे विविध उपक्रमाचा आढावा घेतला.   

सादरीकरणात जिल्हा अधिक्षक कृषी अधिकारी श्री. तोटावार यांनी सांगितले की, सद्यस्थितीत जिल्ह्यात खरीपाचे हंगामाकरिता 777 कोटी रुपये पीककर्ज वाटप करण्यात आले असून त्याची टक्केवारी 62.14 टक्के इतकी आहे.आतापर्यंत सर्वाधिक चंद्रपूर जिल्हा मध्यवर्ती सहकारी बँकेने 94 टक्के पीक कर्ज वाटप केले आहे . उर्वरित जून अखेरीज वाटप करण्या बाबत सर्व बँकाना निर्देश पालकमंत्री महोदयांनी यांनी दिले आहे.

पीक विमा योजने अंतर्गत 91 कोटी 62 लाख मंजूर झाला असून आतापर्यंत 25 कोटी 45 लाख पीक विमा शेताकऱ्यांच्या खात्यामध्ये जमा करण्यात आला आहे.आजच 17 कोटी रुपये  पीक विमा पोर्टलवर अपलोड करण्यात आलेला आहे. उर्वरित रक्कम जून अखेर शेतकऱ्यांच्या खात्यात जमा करण्याबाबत ओरियंटल विमा कंपनीला निर्देश दिले आहे .

जिल्ह्यात एकूण लागवडीलायक क्षेत्र 5 लक्ष 52 हजार 729 हेक्टर असून सर्वसाधारण खरीपाचे क्षेत्र 4 लक्ष 58 हजार 857 हेक्टर (83.01 टक्के)  आहे. जिल्ह्यात खरीप हंगाम 2024-25 मध्ये 1 लक्ष 91 हजार हेक्टरवर भाताची लागवड, 1 लक्ष 80 हजार हेक्टरवर कापूस तर 75 हजार हेक्टरवर सोयाबीनची लागवड करण्याचे नियोजन करण्यात आले आहे. जिल्ह्यात या वर्षी आतापर्यंत 41 हजार 918 हेक्टरवर पेरणी करण्यात आली आहे. जिल्ह्यात 20 जून 2024 पर्यंत 76 हजार 263 मे.टन बियाणे उपलब्ध झाले असून यापैकी 49 हजार 663 मे.टन बियाणांची विक्री झाली आहे. तर 88 हजार मे. टन खते जिल्ह्यात उपलब्ध आहे. बियाणे आणि खतांची कोणतीही कमतरता नसून पुरेसा साठा उपलब्ध असल्याचे श्री. तोटावार यांनी सांगितले.


‘शेतकऱ्यांना कागदपत्रांसाठी अतिरिक्त भुर्दंड पडणार नाही याची काळजी घ्या’
गेल्यावर्षाप्रमाणे यंदाही प्रधानमंत्री पीक विमा योजनेत जास्तीत जास्त शेतकरी सहभागी होतील, यासाठी कृषी विभागाने नियोजन करावे. केवळ 1 रुपयात या योजनेत सहभागी होता येत असले तरी काही ठिकाणी कागदपत्रांसाठी अतिरिक्त पैसे मोजावे लागतात, अशा तक्रारी प्राप्त झाल्या आहेत. त्यामुळे कृषी व महसूल विभागाने याकडे गांभिर्याने लक्ष देऊन शेतक-यांना अतिरिक्त भुर्दंड पडणार नाही, याची काळजी घ्यावी, अशाही सूचना ना. श्री. मुनगंटीवार यांनी अधिकाऱ्यांना दिल्या.


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June 21, 2024   

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Pm fasal bima yojana: खुश खबर! राज्य के किसानों को …


Pm fasal bima yojana: किसानों खुश खबर! इस साल भी राज्य के किसानों को खरीफ हंगाम के दौरान फसल बीमा योजना का लाभ केवल एक रुपये में मिलेगा. इसके लिए राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pm fasal bima yojana) के अंतर्गत पिछले साल खरीफ हंगाम में शुरू की गई 'सर्वसमावेशी फसल बीमा योजना' को इस साल भी लागू करने का निर्णय राज्य के कृषि विभाग ने लिया है. जिसका भी खरीफ हंगाम है उन्हें इस योजना का लाभ मिलेगा.

 

Pm fasal bima yojana: आवेदन की अंतिम तारीख

इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को 15 जुलाई तक आवेदन करना होगा। कृषि मंत्री धनंजय मुंडे ने राज्य के अधिक से अधिक किसानों से इस फसल बीमा योजना का लाभ उठाने का निवेदन किया है.

 

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Pm fasal bima yojana: योजना के बारेमें

केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pm fasal bima yojana) के अंतर्गत पिछले वर्ष खरीफ हंगाम (2023-24) की फसलों के लिए पहली बार 'सर्वसमावेशी फसल बीमा योजना' (कप और कैप मॉडल 80:110) को मंजूरी दी गई थी. इस बीमा योजना के तहत प्राकृतिक आपदाओं, कीट और रोग जैसी अनपेक्षित प्रतिकूल परिस्थितियों में फसल के नुकसान की स्थिति में किसानों को उनकी फसलों के लिए बीमा संरक्षण मिलेगा.

 

 

Pm fasal bima yojana Benefits: योजना के लाभ और उद्देश्य

किसानों की आर्थिक सुरक्षा: अगर प्राकृतिक आपदा, कीट, या रोग के कारण फसल खराब हो जाती है, तो बीमा की मदद से किसानों को पैसे मिलेंगे ताकि उनका जीवन चलता रहे.
नई तकनीक अपनाने का मौका: इस योजना से किसान नई और बेहतर खेती की तकनीकें और सामग्री इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे फसल अच्छी हो.
कर्ज मिलना आसान: बीमा होने से बैंकों को भरोसा होता है और वे किसानों को आसानी से कर्ज दे देते हैं.
सुरक्षित और विविध फसलें: यह योजना किसानों को विभिन्न प्रकार की फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित करती है और उन्हें सुरक्षित रखती है.

 

Pm fasal bima yojana: योजना के अंतर्गत लाभ

  •  प्रतिकूल मौसम के कारण बुवाई न हो पाने से नुकसान
  • फसल के मौसम में प्रतिकूल मौसम से नुकसान
  • बुवाई से कटाई तक की अवधि में प्राकृतिक आग से नुकसान
  •  बिजली गिरना, ओलावृष्टि
  • तूफान, चक्रवात, बाढ़ के कारण फसल ख़राब होना (चावल, गन्ना और जूट को छोड़कर)
  • भूस्खलन, सूखा, बारिश की कमी, कीट और रोगों से उत्पादन में कमी
  • स्थानीय प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान
  • प्राकृतिक कारणों से कटाई के बाद नुकसान

Pm fasal bima yojana: योजना में शामिल की गई फसलें

  • भात (चावल)
  • ज्वारी (ज्वार)
  • बाजरी (बाजरा)
  • नाचणी (रागी)
  • मका (मक्का)
  • तूर (अरहर)
  • मूग (मूंग)
  • उडीद (उड़द)
  • भुईमूग (मूंगफली)
  • तिळ (तिल)
  • कारळे (कपास)
  • सोयाबीन
  • कांदा (प्याज)

Pm fasal bima yojana: आवेदन कैसे करे

इस फसल बीमा योजना का लाभ किसानों को मिले, इसके लिए केंद्र सरकार ने एक स्वतंत्र फसल बीमा पोर्टल शुरू किया है. अनेक प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाले फसल नुकसान से किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए यह योजना शुरू की गई है. इसलिए राज्य के किसानों को केवल 1 रुपये में यह फसल बीमा लेना आवश्यक है.

आवेदन करने के लिए यहाँ क्लीक करें
www.pmfby.gov.in](http://www.pmfby.gov.in) इस वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा.

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